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MP News: मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित धार-झाबुआ-आलीराजपुर अंचल को रेल से जोड़ने का सपना देखे हुए 18 साल बीत चुके है, लेकिन इंदौर-दाहोद रेल परियोजना आज भी अधूरी है। 8 फरवरी 2008 को झाबुआ में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा शुभारंभ की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना में न तो तय समय पर काम पूरा हुआ और न ही लागत पर नियंत्रण रहा।
हालात यह है कि परियोजना की लागत तीन गुना बढ़कर करीब 1800 करोड़ रुपए परियोजना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कुल 201 किलोमीटर में से 81 किलोमीटर रेल मार्ग पर अब तक काम शुरू ही नहीं हुआ है। मौजूदा गति को देखते हुए यह परियोजना 2030 से पहले पूरी होगी, इसकी संभावनाएं भी कम नजर आ रही है।
201 किलोमीटर लंबी इंदौर-दाहोद रेल परियोजना में करीब 120 किलोमीटर का कार्य प्रगति पर है। इंदौर से धार तक करीब 80 प्रतिशत काम हो चुका है, लेकिन टिही, पीथमपुर, गुणावद और धार रेलवे स्टेशन अभी अधूरे हैं, वहीं धार से आगे झाबुआ तक तीन सुरंगों का निर्माण होना बाकी है। इन परिस्थितियों में, धार तक ट्रैक तैयार होने के बावजूद इंदौर-धार रेल सेवा शुरू करना फिलहाल संभव नहीं है। रेलवे के अनुसार, परियोजना पूर्ण हुए बिना संचालन और ट्रैफिक संतुलन कठिन रहेगा।
इन रेल परियोजनाओं का उद्देश्य गुजरात से सटे आदिवासी जिलों को विकास से जोडना, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति देना, आम लोगों के लिए सस्ता और सुलभ सफर उपलब्ध कराना था, लेकिन 18 वर्षों की लेटलतीफी ने इन सभी उम्मीदों को धीमी पटरी पर ला खड़ा किया है।
रेल लाओ महासमिति ने परियोजना की देरी को गंभीर बताते हुए इसे राष्ट्रीय रेल विकास योजना में शामिल करने की मांग तेज कर दी है। समिति के पवन जैन गंगवाल ने कहा कि परियोजना पूर्ण होने से सरकार, आम जनता और पीथमपुर सहित धार के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। समिति के नरेश राजपुरोहित, प्रवीण टॉक, कमल हरोड और शातिलाल शर्मा ने क्षेत्रीय सांसदों को पत्र लिखकर परियोजना को प्राथमिकता से पूर्ण कराने की मांग की है।
Published on:
08 Feb 2026 07:48 pm
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