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Mayra Scheme: अनोखा भात भरने पहुंचे पदाधिकारी, सरस डेयरी की मायरा योजना, बेटियों की शादी में देते हैं 21,000 रुपए

Unique Bhaat Of Rajasthan: दुग्ध उत्पादक नरेंद्र गुर्जर की बेटी की शादी में जयपुर सरस डेयरी संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया सहित पदाधिकारियों ने पहुंचकर भात की रस्में अदा कीं और मायरा भरा।

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दौसा

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Akshita Deora

Feb 10, 2026

Saras Dairy Unique Bhaat

फोटो: पत्रिका

Saras Dairy Mayra Scheme: दौसा जिले के महुवा क्षेत्र के ग्राम पाटोली में सोमवार को जयपुर सरस डेयरी की ओर से एक अनोखी और सराहनीय पहल देखने को मिली। दुग्ध उत्पादक नरेंद्र गुर्जर की बेटी की शादी के अवसर पर जयपुर सरस डेयरी संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया सहित कई पदाधिकारी गांव पहुंचे। उन्होंने पारंपरिक भात की रस्म निभाते हुए मायरा भरा और परिवार को आर्थिक सहयोग प्रदान किया। इस मौके पर गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला।

जयपुर सरस डेयरी संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया ने बताया कि जयपुर सरस डेयरी राजस्थान की सबसे सफल डेयरियों में शामिल है, जो पिछले दस वर्षों से लगातार लाभ में है। डेयरी का उद्देश्य केवल दूध संग्रह और विपणन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालकों और उनके परिवारों के सामाजिक जीवन में भी सहयोग करना है। इसी सोच के तहत मायरा योजना शुरू की गई है, ताकि पशुपालकों की बेटियों की शादी के समय आर्थिक मदद दी जा सके।

मायरा योजना का उद्देश्य

अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की शादी पर परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। मायरा योजना के माध्यम से डेयरी पशुपालकों के इस बोझ को कम करने का प्रयास कर रही है। इस योजना से जुड़े पशुपालकों में डेयरी के प्रति विश्वास और जुड़ाव भी मजबूत हुआ है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद रहे लोग

पाटोली गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में रामचरण गुर्जर रलावता, गंगाराम चौधरी, रामनारायण शर्मा, रमेश फुलरिया, रामअवतार मीना सांथा, लोकेश पीपलखेड़ा, सुमंत टुड़ियाना, राधे पाटोली सहित अनेक पदाधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने जयपुर सरस डेयरी की इस पहल की सराहना की।

मायरा योजना की पूरी जानकारी

जयपुर सरस डेयरी की मायरा योजना 5 अप्रैल 2025 से लागू की गई है। इसके अंतर्गत डेयरी बूथ पर लगातार पांच वर्षों तक दूध देने वाले पात्र पशुपालकों की अधिकतम दो बेटियों की शादी पर 21 हजार रुपये भात के रूप में दिए जाते हैं। यह योजना ग्रामीण पशुपालकों के लिए आर्थिक सहारा बनने के साथ-साथ सामाजिक सहयोग का भी एक अच्छा उदाहरण बन रही है।