
फोटो सोर्स- पत्रिका
MP News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक महीने पहले 35 महीने के बाघ को लाया गया था। रविवार को उसकी मौत हो गई। बाघ को उक्त बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में मुक्त किया गया था और मॉनिटरिंग दल उसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे थे।
दरअसल, वनमंडलाधिकारी वीरांगना टाईगर रिजर्व ने बताया 15 फरवरी को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के मोहली परिक्षेत्र के मानेगाव बीट के कक्ष क्रमांक 159 में शाम 5:30 बजे बाघ का एक शव मिला था। बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात को रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर वन क्षेत्र में मुक्त किया गया था एवं मॉनिटरिंग दल उसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे थे। विगत दो दिवसों से उस बाघ की लोकेशन एक जगह ही आ रही थी।
वनमंडलाधिकारी अनुसार, जब मॉनिटरिंग दल ने पास से बाघ देखा तो वह मृत मिला। सुबह शव के पास सर्चिंग की गई। साथ ही आसपास मौजूद जल स्त्रोतों की पीएच वैल्यू की जांच की गई। दोनों जांचों में किसी तरह के निगेटिव परिणाम नहीं मिले। NTCA यावी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रोटोकॉल अनुरूप पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता एवं रहली में पदस्थ स्थानीय पशु चिकित्सक नीरज ठाकुर के द्वारा एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि डॉ. प्रशांत देशमुख एवं वन संरक्षक सागर रिपुदमन सिंह भदोरिया के समक्ष शव का पोस्टमार्टम किया गया। बाघ की खोपड़ी बुरी तरह से छतिग्रस्त थी और हड्डियां टूटी हुई थी। साथ ही केनाईल के गहरे निशान भी थे।
इधर, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशांत देशमुख एवं वरिष्ठ वन्य प्राणी चिकित्सक संजीव गुप्ता का मानना है कि बाघों की लड़ाई में उक्त बाघ को अन्य बाघ द्वारा मार डाला गया है। पोस्टमार्टम के पश्चात विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में उक्त बाघ के शव को शवदाह किया गया।
Published on:
16 Feb 2026 07:23 pm
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