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T20 World Cup 2026: फॉर्म और आत्मविश्वास की कमी के चलते फुटवर्क की उलझन में फंसे संजू सैमसन, समझें कहां हो रही उनसे गलती

संजू की फॉर्म और आत्मविश्वास में कमी का सबसे साफ असर उनके फुटवर्क पर पड़ रहा है। गेंदबाज़ के गेंद छोड़ने से पहले ही उनका दायां पैर हल्का पीछे खिसक जाता है और बायां पैर भी उसी के साथ मूव करता है। जिस वजह से उन्हें शॉट टाइम करने में दिक्कत हो रही है।

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भारत

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Siddharth Rai

Feb 13, 2026

Sanju Samson

भारतीय विस्फोटक विकेट कीपर बल्लेबाज संजू सैमसन खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं (Photo - BCCI)

Sanju Samson batting Technique Analysis: क्रिकेट में एक पुरानी कहावत है कि अनुभवी बल्लेबाज़ अपने पत्ते आखिरी क्षण तक छिपाकर रखते हैं। वे गेंदबाज़ की कलाई और कदमों को बारीकी से पढ़ते हैं, क्रीज़ पर स्थिर रहते हैं और अनावश्यक हलचल से परहेज करते हैं। पेशेवर खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीखते हैं और उन्हें दोहराने की आदत नहीं बनने देते। लेकिन वर्तमान में संजू सैमसन की बल्लेबाज़ी इन मूल सिद्धांतों से काफी दूर दिख रही है।

फॉर्म और आत्मविश्वास में कमी की वजह से हो रही गलती

उनकी फॉर्म और आत्मविश्वास में कमी का सबसे साफ असर उनके फुटवर्क पर पड़ रहा है। गेंदबाज़ के गेंद छोड़ने से पहले ही उनका दायां पैर हल्का पीछे खिसक जाता है और बायां पैर भी उसी के साथ मूव करता है। यह तकनीक डेथ ओवरों में फिनिशर के रूप में गेंदबाज़ को चकमा देने के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन एक ओपनर या टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ के तौर पर लगातार ऐसा करना बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है।

बार - बार बैकफुट पर जाना पड़ रहा भारी

दरअसल, बड़े शॉट्स खेलने के लिए अतिरिक्त माइक्रोसेकंड हासिल करने की कोशिश या फिर फ्रंट फुट पर आने से हिचकिचाहट उन्हें पहले से तय योजना के साथ बैकफुट पर धकेल देती है। जब दिमाग में स्पष्टता नहीं होती, तो निर्णय भी स्वाभाविक नहीं रहते और फिलहाल संजू के साथ यही स्थिति है। कमज़ोर गेंदबाज़ी आक्रमण के खिलाफ यह तरीका अस्थायी रूप से काम कर सकता है, जैसा कि टी20 वर्ल्ड कप में दिल्ली में गुरुवार को नामीबिया के औसत गेंदबाजों के सामने देखने को मिला, जहां उन्होंने 8 गेंदों में 22 रन ठोके। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खासकर क्वालिटी अटैक के सामने, यह कोई टिकाऊ समाधान नहीं है।

नामीबिया के खिलाफ अच्छी शुरुआत के बाद आउट हुए

दिलचस्प बात यह है कि संजू को अपनी इस समस्या का अहसास भी है। एक मौके पर उन्होंने पहली गेंद पर ही फ्रंट फुट पर कदम बढ़ाया, मानो पीछे हटने की आदत पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हों। लेकिन अगली दो गेंदों पर वे फिर असहज नज़र आए, एक आसान कवर ड्राइव छूट गया, लेग साइड की गेंद पर फ्लिक का टाइमिंग बिगड़ गया। इसके बाद उन्होंने क्रीज़ पर जमे रहने का फैसला किया और कुछ समय तक यह रणनीति सफल भी रही। अच्छी लेंथ की गेंद को उन्होंने सीधे छक्के के लिए उड़ा दिया, लगा कि शायद लय आ गई है।

लेकिन मगर अगले ही ओवर में पुरानी आदत वापस लौट आई। गेंद फेंके जाने से पहले ही वे फिर से बैकफुट पर चले गए। शुरुआत में इससे फायदा भी हुआ, तीन छक्के लगे, जिनमें दो फाइन लेग के ऊपर और एक कवर के ऊपर से गया। ये तीनों शॉट क्रीज़ की लाइन के पीछे से ही खेले गए। लेकिन यही फुटवर्क अंत में भारी पड़ गया। एक धीमी और थोड़ी छोटी गेंद पर वे फिर बैकफुट पर थे, गेंद से काफी दूर थी। अनिश्चित शॉट सीधे मिडविकेट फील्डर के हाथों में चला गया। ऐसा लगा जैसे लगातार बैक-स्टेप लेते हुए वे खुद को क्रीज़ के किनारे तक सीमित कर चुके हों, जहां विकल्प लगभग खत्म हो जाते हैं।

क्रीज़ पर हलचल को आदत बना लिया

यह स्थिरता की कमी उन्हें संतुलित शॉट्स खेलने के विकल्पों से वंचित कर रही है। संजू की यह आठ गेंदों की पारी पहली नज़र में प्रभावशाली लग सकती है, लेकिन गहराई से देखें तो यह आक्रामकता और अधीरता के बीच की पतली रेखा का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। हालिया अंतरराष्ट्रीय पारियों में उन्होंने जरूरत से पहले क्रीज़ पर हलचल को आदत बना लिया है। यही तकनीकी खामी उनकी फॉर्म और टीम में जगह दोनों पर भारी पड़ रही है। उन्हें दूसरा मौका भी महज परिस्थितिवश मिला था, जब अभिषेक शर्मा की तबीयत बिगड़ने से टीम संयोजन में बदलाव करना पड़ा।

संजू की प्रतिभा पर कभी कोई संदेह नहीं रहा, उनकी कलाई की चालाकी और पावर किसी से छिपी नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में निरंतरता सिर्फ़ शॉट्स से नहीं, बल्कि क्रीज़ पर संतुलन, धैर्य और स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता से आती है। अगर वे लंबी रेस के खिलाड़ी बनना चाहते हैं, तो फुटवर्क में स्थिरता लाना और दिमाग को शांत रखना ही उनकी वापसी की असली कुंजी होगी। समय है कि संजू इन बुनियादी बातों पर वापस लौटें, क्योंकि बिना मजबूत नींव के कोई भी इमारत लंबे समय तक नहीं टिकती।

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