
BCCI के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा ( Photo- IANS)
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा (IS Bindra) का रविवार, 25 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर नई दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके परिवार में पत्नी कमल बिंद्रा, पुत्र अमर बिंद्रा और एक पुत्री हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के चेयरमैन जय शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, "बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट प्रशासन के दिग्गज आईएस बिंद्रा के निधन पर मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। ओम शांति।"
भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदलने वाले इंद्रजीत सिंह बिंद्रा एक ऐसे दूरदर्शी रणनीतिकार थे, जिन्होंने क्रिकेट को केवल खेल के मैदान तक सीमित न रखकर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। 1993 से 1996 के बीच बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के साथ उनका साढ़े तीन दशकों का अटूट रिश्ता रहा, जहां उनके मार्गदर्शन में ही मोहाली का विश्वस्तरीय स्टेडियम अस्तित्व में आया। उनके इसी समर्पण को सम्मान देने के लिए वर्ष 2015 में इस स्टेडियम का नाम बदलकर 'आईएस बिंद्रा स्टेडियम' कर दिया गया।
कुशल नौकरशाह के रूप में बिंद्रा और जगमोहन डालमिया की जुगलबंदी ने 1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट के भाग्य को नई दिशा दी। उन्होंने खेल में छिपी व्यावसायिक संभावनाओं को पहचाना और टेलीविजन अधिकारों के द्वार निजी प्रसारकों के लिए खोले। इस कदम ने क्रिकेट की वित्तीय संरचना को पूरी तरह बदल दिया और भारत को वैश्विक क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बना दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका गहरा प्रभाव था। उन्होंने न केवल भारत में बड़े टूर्नामेंट्स की मेजबानी सुनिश्चित की, बल्कि आईसीसी के मुख्य सलाहकार के रूप में भी अपनी विशेष पहचान बनाई।
प्रशासनिक कुशलता के साथ-साथ बिंद्रा अपनी 'अक्खड़' और 'स्पष्टवादी' छवि के लिए भी मशहूर थे। जब 2013 में आईपीएल के दागों ने क्रिकेट की साख पर सवाल उठाए, तब बिंद्रा ही वह शख्स थे जिन्होंने बोर्ड के भीतर रहकर भी पारदर्शिता की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कभी भी पद के मोह में सच बोलने से परहेज नहीं किया। बिंद्रा का जाना केवल एक पूर्व पदाधिकारी का जाना नहीं है, बल्कि उस दूरदृष्टि का ओझल होना है जिसने भारत को विश्व क्रिकेट का 'पावरहाउस' बनाने का सपना देखा और उसे सच कर दिखाया।
Published on:
26 Jan 2026 01:07 am
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