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Tal Chappar : विदेशी मेहमानों से सजा जसवंतगढ़ वेटलैंड, प्रकृति का अद्भुत नजारा

करीब 450 हेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित वातावरण देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रवासी पक्षियों को भी आकर्षित कर रहा है। तीन हजार किलोमीटर से अधिक की लंबी यात्रा तय कर कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मंगोलिया और रूस से आने वाले पक्षी यहां खुले जल क्षेत्र और हरियाली में सहज रूप से विचरण करते नजर आ रहे हैं।

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छापर. जसवंतगढ़ क्षेत्र में विकसित हो रहा मिनी ताल छापर अभयारण्य (Tal Chhapar Wildlife Sanctuary) इन दिनों प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। सर्दी के आगमन के साथ ही यहां पक्षियों की चहचहाहट और कलरव से पूरा इलाका जीवंत नजर आने लगा है। लगभग 200 हेक्टेयर में विकसित वेटलैंड पर इस समय 10 हजार से अधिक प्रवासी पक्षियों का डेरा है, जिससे यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।

करीब 450 हेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित वातावरण देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रवासी पक्षियों को भी आकर्षित कर रहा है। तीन हजार किलोमीटर से अधिक की लंबी यात्रा तय कर कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मंगोलिया और रूस से आने वाले पक्षी यहां खुले जल क्षेत्र और हरियाली में सहज रूप से विचरण करते नजर आ रहे हैं।

यहां डेमोजियल क्रेन, बार हेडेड गूज, ग्रे-लेग गूज, नॉर्दर्न शोवलर, सैंड पाइपर, कॉर्मोरेंट, स्टिल्ट, स्नाइप, आइबिस, यूरेशियन टील, कूट, मलार्ड, रफ, पिनटेल, स्टार्क, रिवर टर्न, ईग्रेट सहित 50 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की रिकॉर्ड उपस्थिति दर्ज की जा रही है।

प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों का यह संगम जसवंतगढ़ मिनी ताल को विशेष पहचान दिला रहा है। बढ़ती पक्षी संख्या और मनमोहक नजारों के साथ यह वेटलैंड अब धीरे-धीरे राजस्थान के प्रमुख पक्षी पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत जगह बनाता नजर आ रहा है।

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