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बच्चों को काटने के मामले में बिल्ली और बंदर से आगे निकले कुत्ते

जनवरी में कुत्तों से काटने के ३०८ केस सामने आए। बिल्ली के ४३ और बंदर के काटने से १२ पीडि़त मिले। इसी तरह दूसरे जानवर गाय, भैंस, चूहा के काटने से १३ लोग आए हैं।

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कुत्तों का सामूहिक कत्लेआम

जिला अस्पताल में बिल्ली और बंदर से ज्यादा कुत्ते बच्चों को निशाना बना रहे हैं। जनवरी माह में जिला अस्पताल में ऐसे ३७६ केस सामने आए हैं। जिनमें गाय, भैंस और चूहा के काटने से पीडि़त लोग भी शामिल है। जिन्हें बचाव के लिए रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया है।


सिविल सर्जन ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी में कुत्तों से काटने के ३०८ केस सामने आए। बिल्ली के ४३ और बंदर के काटने से १२ पीडि़त मिले। इसी तरह दूसरे जानवर गाय, भैंस, चूहा के काटने से १३ लोग आए हैं। अस्पताल के कर्मचारियों ने जब पीडि़तों से पूछा तो उन्होंने बातचीत में बताया कि तीन साल से १४ साल के बच्चे कुत्तों के ज्यादा शिकार बने। जिनकी सुरक्षा परिवारजन नहीं कर पाए। इन बच्चों को गली-मोहल्लों में खेलते समय कुत्तों ने काट खाया। जबकि बिल्ली और बंदर के मामले में ज्यादातर भोजन न देना एक कारण रहा।


पालतू डॉग के नाखून से भी होता है रैबीज


अस्पताल में यह देखा गया है कि आवारा कुत्तों के हमले के साथ पालतू कुत्तों के काटने, शरीर पर झूमने या फिर हाथ में नाखून गड़ाने के मामले भी सामने आए। डॉक्टरों से इसे भी मानव शरीर के लिए घातक बताया। साथ ही कहा कि यदि पालतू डॉग को इंजेक्शन भी लगा है और उसने शरीर में नाखून गड़ाए है तो भी व्यक्ति को इंजेक्शन लगवाना चाहिए। यह भी रैबीज बीमारी का जन्मदाता है।


साल २०२५ में कुत्तों के आए २५८६ केस


जानकारी के अनुसार साल २०२५ में कुत्तों के काटने के २५८६ मामले सामने आए। एक पीडि़त व्यक्ति को चार रैबीज इंजेक्शन लगाए गए। इस फरवरी माह में एक से तीन तारीख तक २२ कुत्ते काटने और २ बिल्ली काटने के केस आए। इसके अलावा बुधवार को भी दस केस कुत्ते काटने के आए। जिन्हें भी चिकित्सकों की राय के अनुसार इंजेक्शन लगाया गया है।


इनका कहना है…


जिला अस्पताल में कुत्ते काटने के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पीडि़तों को इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। जिन इलाकों में ऐसी घटनाएं ज्यादा हो रही है,लोग वहां बचाव के लिए छड़ी रख सकते हैं।
-डॉ.सुशील दुबे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल।
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गाय, भैंस, घोड़े समेत अन्य जानवरों के काटने पर ऐहितियात के तौर पर रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है क्योंकि रैबीज बीमारी के लक्षण कभी भी उभर सकते हैं। इस स्थिति में पीडि़त व्यक्ति को तुरंत रैबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी है।
-डॉ.पंकज माहोरे, पशु चिकित्सक छिंदवाड़ा।
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