
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (फोटोःIANS)
Union Budget 2026-27: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। अपने नौवें बजट में उन्होंने बताया है कि कुल राजस्व का 24 फीसदी कर्ज के जरिए आएगा। मतलब सौ में से 24 रुपये कर्ज के जरिए जुटाए जाएंगे। और, खर्च की बात करें तो सौ में 20 रुपये अकेले ब्याज चुकाने पर जाएंगे। 6 रुपये बड़ी सब्सिडी देने और दो रुपये सिविल पेंशन पर जाएंगे। पिछले बजट में भी यही अनुमान था। मतलब उत्पादकता बढ़ाने वाले काम पर खुल कर खर्च करने के लिए पैसे नहीं होंगे।
वित्त मंत्री ने बजट में सरकार के तीन कर्तव्यों की बात की है। लेकिन, इन कर्तव्यों को पूरा करने में कर्ज बड़ा रोड़ा बनता रहा है।
केंद्र हो या राज्यों की सरकारें, बीते नौ सालों में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद, यानि जो कुछ भी हम उत्पादन करते हैं) की तुलना में कर्ज का अनुपात बढ़ा ही है। हालांकि, 2020 से इस दिशा में थोड़ी सकारात्मक प्रगति दिखाई दे रही है। नीचे दिए गए टेबल से आप इसका आंकड़ा समझ सकते हैं।
इस टेबल में बताया गया है कि किस साल केंद्र और राज्य का कर्ज जीडीपी का कितना प्रतिशत रहा और दोनों का मिला कर कितना रहा।
| वित्त वर्ष (Year) | केंद्र (Centre) | राज्य (State) | संयुक्त (Combined) |
| 2015-16 | 52% | 23.7% | 69% |
| 2016-17 | 50% | 25.1% | 69% |
| 2017-18 | 50% | 25.1% | 70% |
| 2018-19 | 50% | 25.3% | 71% |
| 2019-20 | 53% | 26.6% | 75% |
| 2020-21 | 63% | 31% | 89% |
| 2021-22 | 59% | 29.1% | 84% |
| 2022-23 | 58% | 28.2% | 83% |
| 2023-24 | 58% | 28.1% | 82% |
| 2024-25 | 56% | 28.4% | 81% |
कर्ज बढ़ने के कई कारण होते हैं। रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक आदि क्षेत्रों में खर्च बढ़ाने की जरूरत, वेतन, पेंशन आदि पर बढ़ता खर्च जैसे कारण होते हैं। कर्ज लेकर उत्पादन बढ़े, तब तो ज्यादा चिंता की बात नहीं थी। लेकिन, कर्ज का अच्छा-खासा हिस्सा ब्याज चुकाने, लोगों को मुफ्त अनाज देने जैसी स्कीम चलाने जैसे कामों पर भी खर्च होता है। मतलब इस कर्ज से पैसा बनाने वाला कोई काम नहीं हो पाता है। इसलिए यह ज्यादा चिंता की बात है।
कर्ज बढ़ रहा है, यह एक समस्या है। दूसरी समस्या है कर्ज का खर्च (ब्याज दर आदि) बढ़ना। पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना। इससे भी कर्ज महंगा हो जाता है।
ज्यादा कर्ज मतलब ज्यादा ब्याज। और ब्याज का बोझ किस पर पड़ता है? जनता पर। मतलब जनता से ज्यादा टैक्स की वसूली। इसका मतलब जनता के पास खर्च करने के लिए पैसे की कमी। सरकार के पास भी विकास के काम पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी। जबकि, अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए कम टैक्स और ज्यादा खर्च का फार्मूला ज्यादा कारगर होता है।
कर्ज मुनाफा कमाने के लिए लें तो बोझ ज्यादा हो जाने से भी नुकसान नहीं है। इसे ऐसे समझिए। अगर हमने सौ रुपये उधार लेकर 125 रुपये कमाए और 10 रुपये ब्याज चुकाया, तब भी 15 रुपये का फायदा हुआ। लेकिन, सौ रुपये उधार लेकर गरीबों में बांट दिए तो हमें ब्याज के दस रुपये अपनी जेब से भरने पड़ेंगे। दूसरी स्थिति बने तो हमारा वित्तीय घाटा बढ़ता जाता है। पहली स्थिति हो तो कर्ज ज्यादा होने से मुनाफा ही होता है। देश के मामले में भी यही हाल है।
इस टेबल में आईएमएफ़ के हवाले से बताया गया है कि दुनिया के देशों में सरकारों पर जीडीपी की तुलना में कुल कर्ज कितना है:
| श्रेणी / देश | 2025 (अनुमानित) | 2030 (अनुमानित) |
| उन्नत अर्थव्यवस्थाएं (औसत) | 110 | 119 |
| फ्रांस | 117 | 129 |
| जर्मनी | 64 | 74 |
| जापान | 230 | 222 |
| यूके (UK) | 103 | 105 |
| अमेरिका (US) | 125 | 143 |
| उभरती अर्थव्यवस्थाएं (औसत) | 74 | 84 |
| चीन | 96 | 116 |
| भारत | 81 | 77 |
| पाकिस्तान | 72 | 60 |
| कम आय वाले विकासशील देश (औसत) | 50 | 44 |
| बांग्लादेश | 40 | 44 |
| नेपाल | 49 | 48 |
जापान ने जीपीडी का 230 फीसदी कर्ज ले रखा है। फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन का भी कर्ज-जीडीपी अनुपात सौ के पार है। भारत के मामले में यह 81 है। वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में कर्ज और जीडीपी का अनुपात 55.6 रहने का अनुमान लगाया है। पिछले बजट के संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा 56.1 रखा गया था।
2031 तक केंद्र सरकार अपना कर्ज जीडीपी के 50 प्रतिशत (एक फीसदी ऊपर-नीचे) के स्तर पर ले जाना चाहती है। अगर हर साल एक-एक फीसदी कम किया जाए तब 2027 में भारत सरकार का वित्तीय घाटा जीडीपी के 4.2 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। वित्तीय घाटा कम करना सरकार की बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटे बिना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा।
बजट 2026 में किस मद में कितना आवंटन किया गया है और पिछले बजट में कितना किया गया था, यह आप इस टेबल में देख सकते हैं।
| क्षेत्र (Sectors) | बजट 2025 में आवंटन (₹ करोड़) | बजट 2026 में आवंटन (₹ करोड़) |
| परिवहन (Transport) | — | 5,98,520 |
| रक्षा (Defence) | 4,91,732 | 5,94,585 |
| ग्रामीण विकास (Rural Development) | 2,66,817 | 2,73,108 |
| गृह मामले (Home Affairs) | 2,33,211 | 2,55,234 |
| कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ (Agriculture & Allied Activities) | 1,71,437 | 1,62,671 |
| शिक्षा (Education) | 1,28,650 | 1,39,289 |
| ऊर्जा (Energy) | 81,174 | 1,09,029 |
| स्वास्थ्य (Health) | 98,311 | 1,04,599 |
| शहरी विकास (Urban Development) | 96,777 | 85,522 |
| आईटी और दूरसंचार (IT & Telecom) | 95,298 | 74,560 |
| वाणिज्य और उद्योग (Commerce & Industry) | 65,553 | 70,296 |
| समाज कल्याण (Social Welfare) | 60,052 | 62,362 |
| वैज्ञानिक विभाग (Scientific Departments) | 55,679 | 55,756 |
| कर प्रशासन (Tax Administration) | — | 45,500 |
| विदेश मामले (External Affairs) | — | 22,119 |
| वित्त (Finance) | — | 20,649 |
| पूर्वोत्तर का विकास (Development of North East) | — | 6,812 |
Updated on:
02 Feb 2026 10:26 am
Published on:
01 Feb 2026 10:51 am
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