
India buying Russian oil (Representational Photo)
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के एक्स पर एक पोस्ट करने से शुक्रवार को बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इस पोस्ट में बेसेंट ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थाई छूट देने की बात कही। वित्त मंत्री के इस बयान से भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति चिंताओं को अस्थाई राहत मिलेगी।
अमेरिकी सरकार द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मीडिल ईस्ट में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को ईरानी सेना ने अवरूद्ध कर दिया है। पोस्ट में बेसेंट कहते है कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की यह अस्थाई अनुमति रूस को कोई विशेष वित्तीय लाभ नहीं देगी। क्योंकि यह अनुमति सिर्फ समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए दी गई है।
अमेरिकी वित्त विभाग के ओएफएसी ऑफिस द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि यह छूट 5 मार्च 2026 को भारतीय समय के अनुसार सुबह 10.31 बजे या उससे पहले जहाजों पर लादे गए रूसी कच्चे तेल के लिए दी गई है।
सुबह 8:18 बजे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड का अप्रैल वाला कॉन्ट्रैक्ट इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर लगभग 84.21 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड हो रहा था, जो उसकी पिछली बंद कीमत से लगभग 1.52% कम था। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी गिरकर लगभग 79.31 डॉलर प्रति बैरल रह गई, जो पिछली कीमत से करीब 2.10% कम थी
अमेरिका के लगाए गए प्रतिबंधों और अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा के बाद रूस से कच्चे तेल के आयात में गिरावट आई। लेकिन यह पूरी तरह से बंद नहीं हुआ, क्योंकि गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से आपूर्ति जारी रही।
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है। वैश्विक जहाज ट्रैकिंग फर्म केप्लर के डेटा के अनुसार, रूस से तेल की आपूर्ति नवंबर 2025 में 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन और जुलाई 2024 में 2 मिलियन बैरल प्रति दिन के उच्च स्तर से काफी कम हो गई है।
Published on:
06 Mar 2026 11:21 am
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