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पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या सच में हो सकती है जेल? जान लें RBI के नियम

लोन वसूली और इसे नियंत्रित करने वाले नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और ऋण लेने वाले और ऋणदाता दोनों को यह समझना आवश्यक है।

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भारत में पर्सनल लोन लेना अब एक आम बात बन चुकी है, लेकिन फिर भी इसके साथ जुड़ी कुछ अफवाहें है, जो लोगों को परेशान करती हैं। कई बार लोगों से पर्सनल लोन नहीं चुकाया जाता और वे डिफॉल्ट कर जाते हैं। ऐसे में उनके मन में एक सवाल उठता है कि क्या लोन न चुकाने के कारण उनको जेल जाना पड़ सकता है?

इन्हीं अफवाहों को दूर करने और लोगों को सही जानकारी देने के लिए आरबीआइ समय-समय पर गाइडलाइन जारी करता रहता है। इन गाइडलाइनों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को पर्सनल लोन न चुकाने के कारण जेल नहीं जाना पड़ता। लेकिन इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि ऐसी स्थिति में बैंक क्या-क्या कदम उठा सकता है।

लोन न चुकाने पर बैंक क्या करता है?

आरबीआई ने लोन वसूली के लिए गाइडलाइन निर्धारित की हैं, जिसके अनुसार इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और नैतिक रूप से संचालित किया जाना चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार कर्ज लेने वाला लोन चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे डिफॉल्ट नोटिस जारी करता है। इसके साथ ही उसे लोन चुकाने के लिए अतिरिक्त समय की मोहलत दी जा सकती है। इसके अलावा रिकवरी ऐजेंट को नियुक्त करना और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

कब होती है कानूनी कार्रवाई

लोन न चुकाना एक सिविल मामला होता है, यानि कि पैसों के लेन देन से जुड़ा केस, यह अपराध नहीं होता है। लेकिन यदि लोन लेते समय व्यक्ति ने बैंक के सामने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए हो या जानबूझकर गलत आय दिखाई हो, तब इस तरह के मामलों में यह ठगी का अपराध बन जाता है। इस तरह के केस में व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है और जेल जाने तक की नौबत आ सकती है।

जानिए अपने अधिकार

  • आरबीआई के अनुसार कोई भी बैंक लोन रिकवरी प्रक्रिया में अपशब्दों, धमकियों या किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के तरीकों का प्रयोग नहीं कर सकता।
  • बैंक को कर्ज लेने वाले की निजता और गोपनीयता को बनाए रखना जरूरी है। किसी भी तीसरे पक्ष के लिए उसकी गोपनीय जानकारी को साझा नहीं किया जा सकता।
  • बैंक को आरबीआई लोन रिकवरी एजेंट नियुक्त करने की अनुमति तो देता है लेकिन वसूली ऐजेंट को आरबीआई द्वारा निर्धारित आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही उसे अपने पास औपचारिक पहचान पत्र रखना चाहिए। उसे मानवीय मर्यादाओं का पालन करते हुए कानूनी सीमा में रहते हुए कार्य करना चाहिए। इसके साथ ही वसूली एजेंट वसूली के दौरान कभी भी जबरदस्ती या बल का प्रयोग नहीं कर सकता।