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आज 1 लाख रुपये में हो जाता है गुज़ारा! तो 20 साल बाद आपको कितने पैसे चाहिए होंगे?

रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ एक लक्ष्य की रकम तय करना नहीं है। इसका मतलब है महंगाई को समझना, भविष्य के खर्चों का अनुमान लगाना और आज से ही उसके हिसाब से निवेश शुरू करना। जो लोग इस हकीकत को समय पर समझ लेते हैं, उनके लिए रिटायरमेंट चिंता की वजह नहीं, बल्कि सुकून और सुरक्षा भरा समय बन जाता है।

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भविष्य की प्लानिंग में महंगाई का फैक्टर बेहद अहम होता है (PC: Canva)

किसी टियर-1, टियर-2 शहर में 1 लाख रुपये की सैलरी से आप अपना खर्चा चला सकते हैं। घर की EMI, बच्चों की स्कूल फीस, घर के खर्चों का इंतजाम हो जाता है। लेकिन महीने के अंत में आपके हाथ में कुछ नहीं बचता। इस सैलरी में आप कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान मुश्किल से बना सकते हैं। फिर भी अगर ज्यादा इच्छाएं न हों तो 1 लाख रुपये महीने की सैलरी से गुजारा हो जाता है।

आज का 1 लाख रुपया, 20 साल बाद कितना होगा?

मगर, असली सवाल यह नहीं है कि आज 1 लाख रुपये से जिंदगी चल जाती है या नहीं, असली सवाल यह है कि 20 साल बाद इसी तरह का जीवन जीने के लिए कितने पैसे की ज़रूरत पड़ेगी? क्योंकि हमने अपनी फाइनेंशियल कैलकुलेशन में महंगाई को कभी फैक्टर माना ही नहीं। जबकि हकीकत ये है कि महंगाई से आपकी सारी प्लानिंग धरी की धरी रह सकती है।

महंगाई कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो एक रात में आपकी जेब खाली कर दे। लेकिन ये चुपचाप आपकी जेब में सुराख करती चली जाती है, जिसका पता आपको अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उतना नहीं हो पाता। जैसे, दूध का 1-2 रुपये महंगा हो जाना, स्कूल की फीस 500-1,000 रुपये बढ़ जाना, डॉक्टर की फीस 700 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये हो जाना। ये सब वो चीजें हैं, जो लगातार बढ़ती चली जाती हैं। यही 500-1,000 रुपये के खर्चे आपकी 20 साल की जिंदगी में लगातार जुड़ते चले जाते हैं, अंत में इनका असर काफी बड़ा हो जाता है।

कैलकुलेशन से समझिए

तो चलिए जरा इसकी कैलकुलेशन की जाए कि आज आप 1,00,000 रुपये कमाते हैं और इससे आपका खर्चा चल जाता है, तो 20 साल बाद इस 1 लाख रुपये की क्या वैल्यू होगी।

मौजूदा मंथली खर्च: 1,00,000 रुपये
औसत महंगाई: 6% सालाना
अवधि: 20 साल

इस हिसाब से आज के 1 लाख रुपये, 20 साल बाद 3.20 लाख रुपये हो जाते हैं। यानी आपको अपने घर खर्च के लिए 3.20 लाख रुपये चाहिए होंगे। अब, जरा इसको सालाना खर्च के हिसाब से देखते हैं। 1 लाख रुपये मंथली मतलब 12 लाख रुपये महीना। यही खर्चा 20 साल बाद 38.40 लाख रुपये सालाना हो जाएगा।

महंगाई के बिना प्लानिंग अधूरी है

अब यहां पर आप तर्क कर सकते हैं कि समय के साथ जब खर्चे बढ़ेंगे तो उनकी कमाई भी तो बढ़ेगी। मगर आप ये भूल जाते हैं कि चीजों की महंगाई आपकी सैलरी की बढ़ोतरी से ज्यादा तेज होगी। कई मौके ऐसे भी आएंगे जब आपकी सैलरी नहीं बढ़ेगी। मगर, घर का किराया और रखरखाव हर साल बढ़ता है। इलाज, दवाइयां और हेल्थ इंश्योरेंस की महंगाई औसतन 8-10% की दर से बढ़ती है। बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस लगातार महंगी होती जाती है। रोज़मर्रा के खर्च जैसे दूध, सब्ज़ियां, बिजली, गैस और आने-जाने का खर्च बजट पर दबाव डालते रहते हैं। मतलब साफ है कि 20 साल बाद आप ज़्यादा शानदार जिंदगी तो नहीं जी रहे होंगे। आप सिर्फ आज मुकाबले ज्यादा बिल भर रहे होंगे। यही महंगाई की असली सच्चाई है और इसे समझे बिना भविष्य की योजना अधूरी है।

40 के बाद की जिंदगी और रिटायरमेंट प्लानिंग

एक सच ये भी है कि 40 साल की उम्र के बाद सैलरी की बढ़ोतरी आमतौर पर धीमी पड़ जाती है। नौकरी बदलना मुश्किल हो जाता है और नए मौके कम मिलते हैं। इसी समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्च और परिवार की ज़िम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं। साथ ही, जोखिम लेने की क्षमता भी कम हो जाती है क्योंकि स्थिरता ज़्यादा ज़रूरी लगने लगती है।

नतीजा यह होता है कि जब महंगाई की वजह से खर्चे तेज़ी से बढ़ रहे होते हैं, ठीक उसी समय आमदनी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। यही वजह है कि समझदार रिटायरमेंट प्लानिंग भविष्य के वेतन पर नहीं, बल्कि आज की तैयारी पर टिकी होती है। असली प्लानिंग यहीं से शुरू होती है।

रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ एक लक्ष्य की रकम तय करना नहीं है। इसका मतलब है महंगाई को समझना, भविष्य के खर्चों का अनुमान लगाना और आज से ही उसके हिसाब से निवेश शुरू करना।
जो लोग इस हकीकत को समय पर समझ लेते हैं, उनके लिए रिटायरमेंट चिंता की वजह नहीं, बल्कि सुकून और सुरक्षा भरा समय बन जाता है।

रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे बड़ी गलती

हम अक्सर ये मानकर चलते हैं कि 1 करोड़ रुपये का फंड रिटायरमेंट के लिए काफी होता है। लेकिन सवाल वही, किस साल में 1 करोड़ रुपये काफी होगा, आज या 20 साल बाद। आज जिस 1 करोड़ रुपये को एक बड़ा फंड मान रहे हैं, 20 साल बाद उसकी वैल्यू 6% की महंगाई पर 3.2 करोड़ रुपये होगी। मतलब, 20 साल बाद आपको 3.2 करोड़ रुपये चाहिए।


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