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पत्नी की क्रूरता को माफ करने के बाद पति तलाक का हकदार नहीं.. हाईकोर्ट का फैसला

Bilaspur High court: पति ने पत्नी की तरफ से दहेज प्रताड़ना के दर्ज कराने के साथ गैर पुरुष के साथ किए गए किसी भी सेक्सुअल एक्ट को भी माफ कर दिया था…

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CG High Court: बेडरूम CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फैमिली कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश(photo-patrika)

CG High Court: बेडरूम CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फैमिली कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश(photo-patrika)

Bilaspur High court: हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पत्नी की क्रूरता को माफ कर दोबारा साथ रहने के बाद पति तलाक का हकदार नहीं है। इसके साथ ही पत्नी की अपील स्वीकार कर हाईकोर्ट ने निचली अदालत से पारित तलाक के आदेश को निरस्त कर दिया। बता दें कि पति ने पत्नी की तरफ से दहेज प्रताड़ना के दर्ज कराने के साथ गैर पुरुष के साथ किए गए किसी भी सेक्सुअल एक्ट को भी माफ कर दिया था।

2003 में हुआ था विवाह

इसके बाद सात साल तक पत्नी के साथ भी रहा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि प्रावधानों के आधार पर पति 1955 के अधिनियम की धारा 13(1) के तहत बताए गए आधार पर शादी को खत्म करने का हकदार नहीं है। बता दें कि अपीलकर्ता पत्नी का प्रतिवादी से वर्ष 2003 में विवाह हुआ था। विवाह के पांच वर्ष बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करा पति एवं उसके परिवार वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई। विचारण न्यायालय ने 2009 में पति एवं उसके परिवार वालों को आईपीसी की धारा 498 ए से दोषमुक्त किया।

2017 में पत्नी घर छोड़कर चली गई

दोषमुक्त होने के बाद दोनों 2010 से 2017 तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर वैवाहिक जीवन का निर्वहन करते रहें। 17 दिसंबर 2017 को पत्नी पति का घर छोड़कर चली गई। इसके बाद पति ने परिवार न्यायालय में तलाक के लिए 2020 में आवेदन दिया। आवेदन में पत्नी की ओर से क्रूरता साबित करने 498 ए के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर एवं पत्नी का अन्य पुरूष से संबंध होने की बात कही गई। परिवार न्यायालय ने इसे क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में तलाक का डिग्री पारित किया था।

तलाक के आदेश को पत्नी ने दी चुनौती

निचले कोर्ट के आदेश के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने अपील में सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने 2008 में आईपीसी की धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई। मामले में दोषमुक्त होने के बाद 2010 से दिसंबर 2017 तक दोनों साथ रहें। इससे साफ है कि पति ने पत्नी के कृत्य को माफ किया था।

इसके बाद उसने 2020 में तलाक के लिए आवेदन दिया। इसके बाद 2023 में एक संशोधन आवेदन प्रस्तुत कर पत्नी का अन्य के साथ संबंध होने की बात कही गई। इसमें कहा गया था कि गवाह ने उसकी पत्नी को 2 अक्टूबर 2017 को एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा है।