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पुष्करणा सावा 10 फरवरी को होगा। घरों में मांगलिक गीतों की गूंज प्रारंभ हो गई है। सावे के अवसर पर बटुकों के होने वाले यज्ञोपवीत संस्कार के लिए भी तैयारियां चल रही है। जिन युवक-युवतियों का विवाह सावे के दिन होना है, उनके मांगलिक कार्यक्रमों की शुरूआत हाथधान परंपरा से होगी। इस दौरान पीठी, अटाळ, लखदख सहित युवक-युवतियां बन्ना बनड़ी का स्वरूप धरेंगे। जिन युवकों का विवाह होना है वे सिर पर केसरिया पाग, केसरिया चोला और सफेद पायजामा पहनेंगे। हाथों में लोहे का गेडिया और गेडिये पर कलात्मक बटुआ बंधा होगा, बटुए में खाटा-सुपारी होंगे। इसी प्रकार जिन युवतियों का विवाह होना है वे बनड़ी केसरिया धोती पहनेगी। हाथों में लोहे का पंजा और उस पर बटुआ बंधा होगा। घरों में बन्ना बनड़ी के वस्त्र, गेडिया, पंजा, बटुआ इत्यादि को तैयार किया जा रहा है। बाजार में केसरिया रंग के चोला, धोती, पाग को रंगवाने का कार्य बड़े स्तर पर चल रहा है। वहीं अनेक युवा रेडिमेड केसरिया चोला भी खरीद रहे हैं। घर परिवार की महिलाएं बन्ना बनड़ी के बटुओं को कनार, फूल पत्तियों से कलात्मक रूप से सजा रही है।
पेचा, साफा, धोती, चोला की रंगाई
चाय पट्टी सहित शहर में विभिन्न स्थानों पर पुष्करणा सावे को लेकर बड़ी संख्या में पेचा, साफा, धोती, चोला की रंगाई और कडप देने का कार्य चल रहा है। चाय पट्टी क्षेत्र में पीढ़ी दर पीढ़ी कपड़ा रंगाई का कार्य कर रहे गुल मोहम्मद बताते हैं कि केसरिया पेचा, केसरिया धोती और केसरिया चोला रंगने का कार्य लगातार चल रहा है। विष्णुरूपी दूल्हों की ओर से पहने जाने वाले बनियान की रंगाई का कार्य भी चल रहा है।
बटुक भी धरेंगे बनड़ा स्वरूप
जिन बालकों का यज्ञोपवीत संस्कार होना है, उनको भी बनड़ा स्वरूप धारण करवाया जाएगा। हाथधान के दौरान बटुकों को केसरिया चोला और केसरिया पाग पहनाई जाएगी। हाथों में गेडिया और बटुआ दिया जाएगा।बटुकों के लिए केसरिया चोला, सफेद पायजामा, बटुए तैयार किए जा रहे हैं। पुष्करणा समाज में विवाह करने वाले युवक-युवतियां हाथधान की रस्म से बन्ना-बनड़ी के स्वरूप में रहते हैं। पाणिग्रहण संस्कार के दिन बन्ना -बनड़ी बारात के समय दूल्हा व दुल्हन का स्वरूप धारण करते हैं। इस दौरान हाथधान, मायरा, प्रसाद, आटी, तोरण, खिरोड़ा आदि की सभी रस्में बन्ना बनड़ी स्वरूप में संपन्न करवाते हैं। पुष्करणा सावा पर बड़ी संख्या में विवाह और यज्ञोपवीत संस्कार आयोजनों और रेडिमेड वस्त्रों के बढ़े चलन के कारण बनड़ों के लिए रेडिमेड चोले भी बाजार में उपलब्ध हैं। पहले घरों में तैयार होने वाले बटुए भी अब रेडिमेड उपलब्ध हैं।
Published on:
20 Jan 2026 06:39 pm
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