
Integrated Township (Photo Source- freepik)
MP News: सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने के लिए नियम तो लागू कर दिए हैं लेकिन भोपाल, इंदौर सहित अन्य शहरों के नए मास्टरप्लान अभी भी अटके हुए हैं। इससे कई व्यवहारिक समस्याएं पैदा होने की संभावना हैं। मास्टरप्लान नहीं आने से प्लानिंग एरिया नहीं बढ़ा है, शहर के अंदर जमीन या तो बची नहीं है, यदि है तो बहुत महंगी है। ऐसे में छोटे और मझोले डेवलपर्स और एफॉर्डेबल हाउसिंग का काम प्रभावित होगा।
मास्टरप्लान नहीं आने से मूलभूत अधोसंरचना और लैंडयूज की स्पष्टता भी नहीं हो पाएगी। इससे बड़ी टाउनशिप भले ही आ जाएं और शहर के पास सैटेलाइट टाउन विकसित हो जाए लेकिन एफॉर्डेबल हाउसिंग के प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे। जबकि मध्यमवर्गीय लोगों में अभी एफॉर्डेबल हाउसिंग की सबसे ज्यादा मांग है।
खासतौर पर राजधानी में मास्टरप्लान पिछले 21 साल से लंबित है। ऐसे में यहां पर चुनौतियां ज्यादा होंगी। नया मास्टरप्लान नहीं आने के कारण यह समस्या हर शहर में बढ़ रही है। इसके साथ मास्टरप्लान नहीं आने से परिवहन की समस्या बढ़ रही है क्योंकि निवेश क्षेत्र के बाहर कॉलोनियां तो बन गईं लेकिन मास्टरप्लान की सड़कों का कोई प्रावधान ही नहीं है। लंबे समय से नए मास्टरपलान को लेकर सरकार स्तर पर प्रक्रिया जारी है लेकिन अब तक ठोस परिणाम नहीं आ सके।
प्रदेश में शहरीकरण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मकानों की जरूरत भी बढ़ रही है, इससे निवेश क्षेत्र के बाहर अवैध कॉलोनियां बनना शुरू हो जाती हैं। एफॉर्डेबल हाउसिंग के लिए सरकारी जमीन केवल सरकारी प्रोजेक्ट के लिए मिल रही हैं, निजी डेवलपर को जमीन मिलना मुश्किल हो रहा है। नए मास्टरप्लान में एफॉर्डेबल हाउसिंग के लिए प्रावधान किए जाते हैं। ताकि निम्न आय वर्ग को भी आवास मिलें और काम करने के लिए आसानी से लोग मिलते रहें।
इंटीग्रेटेड टाउनशिप नियमों के अनुसार 10 हेक्टेयर से कम जमीन पर टाउन का विकास नहीं हो सकेगा। इसके साथ डेवलपर की न्यूनतम नेटवर्थ 5 करोड़ रुपए और वार्षिक औसत टर्नओवर 6 करोड़ होना अनिवार्य है। यही नहीं टाउनशिप डेवलपर को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। पंजीयन शुल्क भी 50000 तय किया गया है, जो सिर्फ पांच साल के लिए हैं।
इसके बाद नवीनीकरण कराने पर भी शुल्क 25000 देना होगा। इन शर्तों के कारण छोटे और मझोले डेवलपर अपने आप इस योजना से बाहर हो जाएंगे। क्योंकि अभी छोटे डेवलपर एक से पांच एकड़ में ही कॉलोनियां बना लेते हैं। लेकिन अब टाउनशिप विकास के लिए बड़े बिल्डर और रियल एस्टेट कंपनियां ही पात्रता हासिल कर पाएंगी। 10 हेक्टेयर जमीन पाने के लिए डेवलपर को किसानों को मुआवजा देना भी आसान नहीं होगा।
Published on:
13 Feb 2026 11:01 am
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