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महिलाओं ने श्रद्धा के साथ मनाया दशा माता पर्व, सुख-समृद्धि के लिए की पीपल की पूजा

dasha mata puja: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर श्री बजरंग मंदिर में मनाया गया दश मता का पर्व।

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dasha mata puja

dasha mata puja women worship peepal tree for prosperity

dasha mata puja: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हर्षवर्धन नगर स्थित श्री बजरंग मंदिर, पम्पापुर में शुक्रवार को 'दशा माता' का पर्व मनाया गया। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर आयोजित इस पूजन में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने भाग लिया। सुबह से ही मंदिर में महिलाओं का तांता लगा रहा। इस दौरान महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा अर्चना कर कच्चे सूत का धागा लपेटा और सुख-समृद्धि की कामना की।

घर की 'दशा' सुधारने के लिए कठिन साधना

कार्यक्रम के मुख्य पुरोहित आचार्य लोकेश शर्मा ने बताया कि यह व्रत मुख्य रूप से घर की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति सुधारने के लिए किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, चैत्र दशमी पर विधि-विधान से पूजन करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। पूजन के दौरान महिलाओं ने मंदिर परिसर में स्थित पीपल के वृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि पीपल में त्रिदेवों का वास होता है, इसलिए महिलाओं ने वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटते हुए 10 बार परिक्रमा की। इस दौरान वातावरण मंत्रोच्चार और पौराणिक कथाओं के वाचन से भक्तिमय बना रहा।

संख्या '10' का विशेष महत्व

दशा माता की पूजा में '10' के अंक का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसका महिलाओं ने पूर्ण निष्ठा से पालन कियाष पूजा के लिए कच्चे सूत का एक विशेष डोरा तैयार किया गया, जिसमें 10 तार और 10 गांठें लगाई गईं। इसे हल्दी से रंगकर माता को अर्पित किया गया और बाद में महिलाओं ने इसे अपने गले में धारण किया। पूजन सामग्री में 10 गेहूं की ढेरी, 10 सिक्के और भोग के लिए 10 मीठे पूड़े अर्पित किए गए। नियमों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं ने केवल एक समय भोजन किया। व्रत की शुचिता बनाए रखने के लिए भोजन में नमक का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहा। महिलाओं ने आटे से बने मीठे पकवानों का सेवन कर व्रत पूर्ण किया।