
big decision on 7 years punishment pending cases (फोटो- ANI)
Supreme Court: देश की अदालतों में अब 7 साल तक की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देकर तेजी से निपटाने की राष्ट्रीय नीति अपनाई जाएगी। इससे लंबित मामलों का बोझ कम होगा। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में दो दिनी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) सम्मलेन के आखिरी दिन रविवार को लिए कई फैसलों में यह अहम रहा। सम्मलेन में न्याय व्यवस्था को एकीकृत, प्रभावी और जन केंद्रित बनाने के लिए भी कई निर्णय लिए गए। इस पर भी सहमति बनी कि न्याय में देरी आम लोगों के विश्वास को कमजोर करती है। सम्मलेन में सीजेआइ सूर्यकांत समेत शीर्ष कोर्ट 9 न्यायाधीश व हाईकोर्ट के सभी 25 न्यायाधीश शामिल थे। (MP News)
सम्मलेन में मीडिया ट्रायल पर भी चिंता जताई गई। कहा गया, न्याय का फैसला कोर्ट में होना चाहिए, टीवी स्टूडियो में नहीं। मीडिया ट्रायल से निर्दोष व्यक्ति की छवि खराब होती है और इसे रोकना जरूरी है। डिजिटल व भाषाई समावेशन: सम्मलेन में ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग और स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देकर न्याय को आम जनता के और करीब लाने का संकल्प लिया गया। सम्मलेन ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारतीय न्याय व्यवस्था अब परंपरागत ढांचे से आगे आधुनिक, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल प्रणाली की ओर कदम बढ़ा रही है।
चीफ जस्टिस ने इस पर गहरी चिंता जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें बड़ी संख्या में अनावश्यक अपील और मुकदमे दायर कर रही हैं। इससे अदालतों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। न्यायाधीशों ने सुझाव दिया कि मुकदमा दायर करने से पहले कानूनी विवेक और सार्वजनिक हित का आकलन करें। जिन मामलों में कानून स्पष्ट है या पहले ही न्यायिक दृष्टांत मौजूद हैं, वहां अपील से बचना चाहिए।
Published on:
08 Feb 2026 10:59 pm
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