
भिण्ड. आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन संचालित जिले के 17 शासकीय सीनियर जूनियर छात्रावासों का किराया तीन साल से भुगतान नहीं हो रहा है। मई 2025 की स्थिति में यह राशि 1.67 करोड़ रुपए से अधिक थी। वहीं इन छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए 1450 रुपए के मान से मिलने वाला बजट भी तीन माह से नहीं आया है जिससे छात्रावासों में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
इन छात्रावासों में रहने वाले दो हजार 266 विद्यार्थियों को भी हर माह 1450 रुपए मान से राशि का आवंटन किया जाता है। प्रति माह यह राशि 32 लाख 85 हजार 700 रुपए होती है, जो तीन माह की मिलाकर 98.57 लाख रुपए से अधिक है। यह राशि नहीं मिलने से छात्रावास संचालन का गणित बिगड़ गया है। भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं जुटाना मुश्किल हो गया है। जिसके कारण छात्र परेशान हो रहे हैं। व्यावहारिक समस्या यह है कि जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण का पद लंबे समय से रिक्त है। अतिरिक्त प्रभार जनवरी में मुरैना के जिला संयोजक सौरव ङ्क्षसह राठौड़ को दिया गया है। वे सप्ताह में एक ही दिन जिले में आते हैं।
जिले में 17 शासकीय जूनियर, सीनियन कन्या छात्रावासों का संचालन किराए पर किया जा रहा है। एक छात्रावास का औसतन किराया 26 हजार से 60 हजार रुपए प्रतिमाह तक है। दो छात्रावासों का भाड़ा औचित्य प्रमाण-पत्र न होने से उनका किराया भुगतान स्वीकृत नहीं हो पाया है। ऐसे मार्च 2023 से मार्च 2026 एवं इससे भी पहले का किराया भुगतान लंबित है। छात्रावास के भवन स्वामियों का 22 से 35 माह तक का यह किराया भुगतान न होने से छात्रावासों के संचालन की व्यावहारिक समस्या आ रही है। इनमें से भिण्ड शहर में ही 11 से अधिक छात्रावासों का संचालन निजी भवनों में किया जा रहा है। दबाव बढऩे पर पर विभाग ने मई 2025 में इस संबंध में एक पत्र आयुक्त अनुसूचित जाति विकास, मप्र शासन को लिखा था। इसके तीन दिन पहले कलेक्टर ने भी पत्र लिखा था। उसके बाद अगस्त 2025 में बजट का आवंटन भी शासन से प्राप्त हो गया, लेकिन भुगतान अब तक नहीं हो पाया है।
अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थाओं को विभाग से 20 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है, लेकिन उसके भुगतान में भी समस्या आ रही है। छात्रावासों का किराया भुगतान के लिए शासन से बजट जुलाई 2025 में ही प्राप्त हो चुका है, लेकिन भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। मकान मालिकों को डर है कि कहीं वित्तीय वर्ष समापन के साथ बजट ही लैप्स न हो जाए।
यह बात सही है कि छात्रावास भवनों का किराया भुगतान अटका है, लेकिेन यह प्रदेश भर की समस्या है। भुगतान के नियमों में परिवर्तन से समस्या आई है। हम भोपाल में ही हैं, इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। विद्यार्थियों के भोजन आदि का भुगतान भी लटका है, कोशिश है जल्द हो जाए।
सौरव ङ्क्षसह राठौड़, प्रभारी जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभग, भिण्ड।
Updated on:
12 Mar 2026 11:39 pm
Published on:
12 Mar 2026 11:38 pm
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