
Tomorrow is the festival of Dashamata; married women will ask for blessings of eternal good fortune and happiness and prosperity.
घर-परिवार की दशा सुधारने, संकटों को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना का प्रमुख लोकपर्व दशामाता 13 मार्च को पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत को लेकर शहर और ग्रामीण अंचलों की महिलाओं में खासा उत्साह है। पर्व की तैयारियों को लेकर बाजारों में भी पूजन सामग्री, हल्दी, कुमकुम और सूत के डोरे की खरीदारी तेज हो गई है। पूजा ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:15 बजे से शुरू होगी जो सुबह 11:19 बजे तक होगी। उसके बाद दोपहर 12:24 से 1:11 बजे तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि दशामाता पर्व पर सुहागिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 तार और 10 गांठों वाला विशेष डोरा (गंडा) गले में धारण करती हैं। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है, और इस दिन विधि-विधान से पूजा करने व पेड़ की 10 बार परिक्रमा कर सूत लपेटने से घर की दरिद्रता दूर होती है और परिवार की 'दशा' में सुधार होता है।
पूजन के दौरान महिलाएं समूह में बैठकर दशामाता की कथा विशेष रूप से राजा नल और रानी दमयंती की कहानी सुनेंगी। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य के जीवन में अच्छी और बुरी दशाएं (समय) आती रहती हैं, लेकिन धर्म, विश्वास और धैर्य के मार्ग पर चलने से अंततः सुख की प्राप्ति होती है। पूजन के बाद महिलाएं घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम और हल्दी के छापे (हाथ के निशान) भी लगाएंगी। घर में गेहूं और गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजन लापसी आदि का प्रसाद चढ़ाया जाएगा।
Published on:
12 Mar 2026 06:43 pm
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