
The first solar eclipse of the year will take place on February 17, with a 'ring of fire' visible in the sky.
साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना 17 फरवरी फाल्गुन अमावस्या को होने जा रही है। इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा, जो एक वलयाकार रिंग ऑफ फायर ग्रहण होगा। हालांकि, यह खगोलीय अजूबा भारत में दिखाई नहीं देगा। इसके चलते देश में इसका धार्मिक सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
विज्ञान के साथ-साथ ज्योतिष और धर्म के नजरिए से इस साल का फरवरी-मार्च का महीना बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद 3 मार्च को धुलंडी के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।
विज्ञान के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। 17 फरवरी को होने वाले वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा का आभासी आकार सूर्य से छोटा होगा। इस कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा और सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकती हुई अंगूठी या आग के घेरे की तरह दिखाई देगा।
सूर्य ग्रहण के बाद, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण होलिका दहन के दूसरे दिन धुलंडी के दिन पड़ रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को ऊर्जा परिवर्तन का एक बड़ा कारक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान ग्रहों की बदलती स्थिति मानव मन, प्रकृति और सामाजिक घटनाओं पर गहरा प्रभाव डालती है।
Published on:
16 Feb 2026 09:27 am
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