
Delay in pension will be costly: 9% interest will be charged from the responsible
प्रदेश में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। अब रिटायरमेंट के दिन ही पेंशन परिलाभों का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। यदि पेंशन प्रकरण में बेवजह देरी होती है, तो संबंधित दोषी अधिकारी की जेब से 9 प्रतिशत ब्याज वसूला जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों और डाइट प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं।
हाल ही में 29 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव की ओर से ली गई समीक्षा बैठक में सामने आया कि कई कार्मिकों को सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। मुख्य सचिव ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। इसी के अनुपालन में वित्तीय सलाहकार (प्रारंभिक शिक्षा) ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि पेंशन प्रकरणों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार पेंशन प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए समय सीमा तय की है। कर्मचारी की सेवानिवृत्ति तिथि से 6 माह पूर्व उसका पेंशन प्रकरण तैयार कर पेंशन विभाग को भेजना अनिवार्य होगा। रिटायरमेंट से कम से कम 3 महीने पहले पेंशन भुगतान आदेश जारी करवाना सुनिश्चित करना होगा। राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 89 के तहत, यदि बिना किसी ठोस कारण के रिटायरमेंट के 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता, तो विलम्ब की जवाबदेही तय होगी। आदेश में उल्लेख है कि देरी की स्थिति में पेंशन राशि पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा। खास बात यह है कि यह ब्याज सरकार नहीं भरेगी, बल्कि इसे उस उत्तरदायी अधिकारी या कर्मचारी की सैलरी से वसूला जाएगा जिसकी लापरवाही से फाइल अटकी थी।
Published on:
16 Feb 2026 09:08 am
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