
पर्यावरण में प्लास्टिक कितने समय तक टिकता है? (फोटो डिजाइन: पत्रिका)
How Long Plastic Lasts in Environment: रोज सुबह उठने से लेकर रात को वापस बिस्तर तक जाने के दौरान हम ऐसी कई चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिनको हमें बहुत पहले त्याग देना चाहिए था। ये छोटी-बड़ी वस्तुएं जैसे टूथब्रश, प्लास्टिक की बोतल, स्ट्रॉ, छुरी-कांटा, सैनेटरी पैड, डिस्पोजेबल डायपर, पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि आज के दौर में प्लास्टिक हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसका असर पर्यावरण पर बेहद गंभीर है। ये हम इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि जीव-जन्तुओ के लिए भी बेहद खतरनाक है। प्लास्टिक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह प्राकृतिक रूप से आसानी से नष्ट नहीं होता।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुख्य रूप से प्लास्टिक से बनी रोजमर्रा की चीजों को पूरी तरह से Decompose होने में सालों लग जाते हैं। फिर चाहे वो प्लास्टिक से बने कप हों या प्लास्टिक के माइक्रोन फाइबर से बने सैनेटरी पैड्स हों। और इसमें कोई दो राय नहीं है कि पूरी दुनिया में लगभग हजारों टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसको पूरी तरह से नष्ट होने में सालों लग जाते हैं और इस दौरान ये कूड़े और प्रदूषण के रूप में हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करते रहते हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम आपको प्लास्टिक के पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभावों और रोजमर्रा में इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ प्लास्टिक प्रोडक्ट्स को डिकम्पोज होने में लगने वाले समय के बारे में बताएंगे।
वर्त्तमान में हमारे आस पास की हर चीज प्लास्टिक से बनी है ,जैसे मोबाइल फोन और उसका कवर, कार, घर और उसमें इस्तेमाल होने वाला अधिकतर सामान, और इसके चलते हम हर साल प्लास्टिक का उत्पादन बढ़ाते जा रहे हैं, इसमें से भी ज्यादातर सामान Use and Throw (एक बार इस्तेमाल) होने वाली वस्तुओं के लिए होता है। ScienceDirect में प्रकाशित हुई रिसर्च के अनुसार, 1950 के दशक से अब तक लगभग 83 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन किया गया है, और इसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा लैंडफिल या प्राकृतिक वातावरण में जमा हो जाता है।
ये तो हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक एनवायरमेंट में काफी सालों तक बना रहता है, जिससे पृथ्वी और इस पर रहने वाले सभी जीवों को खतरा होता है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्लास्टिक पर की गई कई रिसर्च से ये बात सामने आई है कि प्लास्टिक पूरी तरह से जैविक नहीं है, इसलिए तकनीकी रूप से यह विघटित नहीं हो सकता। प्लास्टिक आंशिक या पूर्ण रूप से कृत्रिम होते हैं, यानी कि इसको इंसानो द्वारा बनाया जाता है। प्लास्टिक को बनाने के लिए जल-प्रतिरोधी, पराबैंगनी किरण अवरोधक, प्लास्टिसाइजर और अन्य प्रदर्शन-वर्धक योजक भी मिलाये जाते हैं, जिससे यह हमारे पर्यावरण के लिए और भी अधिक हानिकारक बन जाता है।
आइए जानते हैं कि किन वस्तुओं को Decompose होने में कितना समय लगता है।
प्लास्टिक कई प्रकार की होती है और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर, इसके नष्ट होने की प्रक्रिया में कुछ दशकों से लेकर कुछ सौ सालों तक का समय लग सकता है। यहां कुछ सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक से बनी रोजमर्रा की चीजों के खत्म होने का एक अनुमानित समय बता रहे हैं, जैसे:
कई शहरों में प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगने के बावजूद, ये अभी भी प्लास्टिक प्रदूषण के सबसे व्यापक स्रोतों में से एक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल दुनिया भर में लगभग 500 अरब प्लास्टिक बैग इस्तेमाल होते हैं। इनमें से अधिकांश प्लास्टिक बैग पॉलीइथिलीन से बने होते हैं, जो एक प्रकार का प्लास्टिक है जो छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और हमारे जलीय जीवन को प्रदूषित करता है, मिट्टी को दूषित करता है और जानवरों द्वारा खाए जाने पर हमारी खाद्य श्रृंखला पर भी बुरा असर डालता है। हालांकि, अब इसके विकल्प के तौर पर दोबारा यूज करने वाले प्लास्टिक बैग और सूती जालीदार फलों और सब्जियों के बैग जागरूक खरीदारों में काफी प्रचलित हो गए हैं, जो पर्यावरण के लिए एक अच्छी बात है।
क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में प्रतिदिन 5 करोड़ से अधिक प्लास्टिक स्ट्रॉ कूड़े में फेंके जाते हैं? प्लास्टिक के स्ट्रॉ इतने छोटे होते हैं कि उन्हें रीसायकल नहीं किया जा सकता, इसलिए एक बार इस्तेमाल करने के बाद वे कचरे के ढेर में ही चले जाते हैं। अगर आपको स्ट्रॉ पसंद हैं तो उन्हें स्टेनलेस स्टील के पीने की स्ट्रॉ से बदलने पर विचार करें जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
पेय पदार्थों, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, जूस और पानी की प्लास्टिक की बोतलें दुनिया में सबसे अधिक रीसायकल होने वाले प्लास्टिक में से एक हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, प्लास्टिक की पानी की बोतलें आमतौर पर पॉलीइथिलीन टेरेफ्थालेट (PET) से बनी होती हैं, जो एक पारदर्शी और हल्का प्लास्टिक है जिसे नष्ट होने में लगभग 500 साल लगते हैं। इसलिए प्यास लगने पर झट से 10-20 रुपये वाली पानी की बोतल खरीदने से पहले थोड़ा रुकिए और सोचिये। प्लास्टिक की बोतल के बदले आप अपने साथ घर से ही स्टील या कांच की बोतल लेकर चलिए, इससे आपके पैसे भी बचेंगे और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में भी आप कुछ योगदान करेंगे।
डिस्पोजेबल कप हार्ड और टिकाऊ प्लास्टिक से बने होते हैं, जिन्हें लैंडफिल में गलने में तकरीबन 500 साल लगते हैं। इनका बुरा असर हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है और आने वाली जेनरेशन के लिए ये भयावह साबित हो सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर साल दुनिया भर में लगभग 20 अरब (20 Billion) से ज्यादा इस्तेमाल किए गए डिस्पोजेबल डायपर फेंके जाते हैं और ये आंकड़ा बहुत बड़ा है। इससे सालाना 35 लाख टन से अधिक कचरे का निर्माण होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बच्चे पर उसके जन्म के बाद के पहले दो सालों में ही औसतन 6,000 से ज्यादा डायपर का उपयोग किया जाता है। ये डायपर कूड़े के ढेर में जमा होने वाली तीसरी सबसे बड़ी वस्तु है जिसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। भारत और अन्य देशों में, डिस्पोजेबल डायपर के बढ़ते उपयोग के कारण यह कचरा प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कई रिपोर्ट्स के हिसाब से, हर साल दुनिया भर में लगभग 4 अरब से अधिक प्लास्टिक टूथब्रश कूड़े में फेंक दिए जाते हैं, जो खतरनाक प्लास्टिक कचरे में योगदान करते हैं। आपने अक्सर गौर किया होगा कि डेंटिस्ट अपने पेशेंट्स को हर 3-4 महीने में ब्रश बदलने की सलाह देते हैं, और अगर इस सलाह को फॉलो किया जाए तो यह संख्या 23 से 29 अरब तक भी पहुंच सकती है। आपको बता दें कि हर साल केवल संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में तकरीबन 1 अरब टूथब्रश में कूड़े में फेंके जाते हैं, जिनसे 50 मिलियन पाउंड प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इससे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि केवल 3.5 अरब लोग ही टूथब्रश का उपयोग करते हैं। हालांकि, अब प्लास्टिक के टूथब्रश के विकल्प के रूप में बाजार में इको-फ्रेंडली (बांस) ब्रश आ गए हैं। अगर आप भी अपना योगदान देना चाहते हैं, तो बांस के टूथब्रश का इस्तेमाल शुरू करें और अपने दोस्तों और परिवार को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
मेंट्रूअल हाइजीन प्रोडक्ट्स जैसे सैनिटरी पैड और टैम्पॉन 90% तक प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री से बने होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन 8,000 से 10,000 पीरियड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है। ये प्रोडक्ट्स इस्तेमाल के बाद सीधे कचरे में चले जाते हैं और लैंडफिल में 500 से 800 साल तक पड़े रह सकते हैं।
एक प्लास्टिक के कांटे-चम्मच को पूरी तरह से डिकम्पोज होने में लगभग 200 से 1000 वर्ष लग सकते हैं। ये पॉलीस्टायर्न (Polystyrene) से बने होते हैं और बनावट में छोटे होने के कारण रीसायकल नहीं हो पाते, जिससे ये सालों तक लैंडफिल या समुद्र में बने रहते हैं। बता दें कि प्लास्टिक के ये प्रोडक्ट्स प्राकृतिक रूप से कभी पूरी तरह से नष्ट नहीं होते, बल्कि माइक्रोप्लास्टिक में टूट जाते हैं।
फोम प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट होने में 500 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। यह वास्तव में प्राकृतिक रूप से डिकम्पोज नहीं होता, बल्कि सूर्य की रोशनी (फोटोडिग्रेडेशन) से छोटे-छोटे टुकड़ों (माइक्रोप्लास्टिक) में टूट जाता है।
रोजमर्रा की इन वस्तुओं के अलावा सिगरेट बड्स, मछली पकड़ने की जाली और जूस, दूध और कई तरल पदार्थों की पैकिंग में काम आने वाले टेट्रा पैक को नष्ट होने में कितना समय लगता है वो भी जानिये।
आप भी प्लास्टिक कचरे से निपटने में मदद करने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं, जैसे:
प्लास्टिक प्रदूषण आज एक वैश्विक पर्यावरण संकट बन चुका है। कुछ मिनटों की सुविधा के लिए इस्तेमाल किया गया प्लास्टिक आने वाली पीढ़ियों के लिए सदियों तक समस्या बन जाता है। इससे निपटने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि हम सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी बनाएं और उसके स्थान पर कपड़े के बैग, स्टील या कांच की बोतलें, बांस के टूथब्रश और अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें।
Updated on:
09 Feb 2026 08:19 am
Published on:
08 Feb 2026 11:36 pm
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