
बैतूल। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल की समस्याएं उस समय और बढ़ गईं जब दो वरिष्ठ चिकित्सकों ने व्यक्तिगत कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दोनों डॉक्टरों ने करीब एक माह पहले ही शासन को इस्तीफ ा भेज दिया था। डॉक्टरों के अस्पताल छोडऩे के बाद सिविल सर्जन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसका सीधा असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है।इस्तीफा देने वालों में जिला अस्पताल में लंबे समय से पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आनंद मालवीय और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष श्रीवास्तव शामिल हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहले से ही कमी झेल रहे जिला अस्पताल में इन दोनों के जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। अस्पताल में विशेषज्ञों के कुल 31 स्वीकृत पदों में से केवल 11 पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 20 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। हाल ही में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा रघुवंशी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष श्रीवास्तव के अस्पताल छोडऩे से इलाज व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। डॉक्टरों के लगातार इस्तीफों के कारण मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे गरीब और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब डॉक्टरों की कमी को दूर करना एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।डॉ. मालवीय ने बताया कि वे अब निजी क्षेत्र में कार्य करते हुए अपने स्वयं के अस्पताल की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने जिला अस्पताल से इस्तीफा दिया है। इधर, जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष श्रीवास्तव पिछले छह वर्षों से सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने निजी कारणों से 27 नवंबर 2025 को इस्तीफा दिया था और एक माह के नोटिस पीरियड के दौरान 27 दिसंबर तक अस्पताल में सेवाएं दीं। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पिता स्व. अरुण श्रीवास्तव द्वारा स्थापित निजी अस्पताल के संचालन के लिए वे वहीं सेवाएं देंगे।
Published on:
11 Jan 2026 09:08 pm
