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हादसे के बाद जागा प्रशासन, सवालों के घेरे में हाईवे सुरक्षा व्यवस्था

-बरेठा घाट दुर्घटना के बाद टीएल बैठक में कलेक्टर के निर्देश, पहले क्यों नहीं दिखी गंभीरता? बैतूल। जिले के बरेठा घाट में हुए भीषण सडक़ हादसे के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है। रविवार को बरेठा घाट पर एक अनियंत्रित ट्राले के खड़ी कारों में घुस जाने से एएसआई की पत्नी की दर्दनाक मौत […]

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-बरेठा घाट दुर्घटना के बाद टीएल बैठक में कलेक्टर के निर्देश, पहले क्यों नहीं दिखी गंभीरता?

बैतूल। जिले के बरेठा घाट में हुए भीषण सडक़ हादसे के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है। रविवार को बरेठा घाट पर एक अनियंत्रित ट्राले के खड़ी कारों में घुस जाने से एएसआई की पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बेटे की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इस घटना ने जिले की हाईवे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठता है कि यदि यह हादसा नहीं होता, तो क्या प्रशासन अब भी आंखें मूंदे बैठा रहता?
घटना के बाद सोमवार को आयोजित टीएल बैठक में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने जिले में नेशनल हाईवे सहित सभी प्रमुख मार्गों पर सडक़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास मौजूद अतिक्रमण को चिन्हित कर तत्काल हटाने के आदेश भी दिए। हालांकि, यह निर्देश कोई नए नहीं हैं। पूर्व में भी कई बैठकों में सडक़ सुरक्षा को लेकर बातें होती रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी हादसों के रूप में सामने आ रही है। कलेक्टर ने बरेठा घाट को गंभीर और संवेदनशील स्थल बताते हुए वहां सुरक्षा संकेतक, चेतावनी बोर्ड, क्रैश बैरियर और अन्य सुधार कार्य शीघ्र कराने की बात कही। साथ ही नेशनल हाईवे से गांवों को जोडऩे वाली एप्रोच सडक़ों पर स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए गए। ट्रैफिक पुलिस द्वारा चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थलों पर संबंधित सडक़ निर्माण एजेंसियों को सुधार कार्य करने होंगे, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा पहले से चिन्हित किए गए इन ब्लैक स्पॉट्स पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ी घटना का इंतजार करता है? बरेठा घाट जैसे खतरनाक मोड़ों पर न तो पर्याप्त संकेतक थे और न ही ट्रकों की गति नियंत्रित करने की कोई ठोस व्यवस्था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरेठा घाट पर आए दिन तेज रफ्तार भारी वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। अब जब एक जान चली गई, तब जाकर प्रशासन सक्रिय हुआ है। यदि इन निर्देशों पर भी केवल कागजी कार्रवाई हुई, तो आने वाले दिनों में ऐसे हादसे दोहराने से कोई नहीं रोक सकता।