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गणतंत्र दिवस सम्मान पर सम्मान का विवाद: दो बार निलंबित शिक्षक का कर दिया सम्मान

-शिक्षा विभाग ने झाड़ा पल्ला, बोला हमारी ओर से कोई नाम नहीं भेजा गया, अब जांच में जुटा विभाग। बैतूल। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए एक शिक्षक को सम्मानित किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद का कारण […]

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-शिक्षा विभाग ने झाड़ा पल्ला, बोला हमारी ओर से कोई नाम नहीं भेजा गया, अब जांच में जुटा विभाग।

बैतूल। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए एक शिक्षक को सम्मानित किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद का कारण प्राथमिक शाला मरामझिरी, संकुल केंद्र कन्या गंज में पदस्थ शिक्षक सुभाष सिंह ठाकुर को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा पत्र दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई। शिकायकर्ता द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए लिखित आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नियमों की अनदेखी कर एक ऐसे शिक्षक को सम्मानित किया गया, जिसके विरुद्ध पूर्व में गंभीर शिकायतें और दंडात्मक कार्रवाइयां हो चुकी हैं।
आवेदन में उल्लेख है कि संबंधित शिक्षक को जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण पालकों की शिकायतों के आधार पर दो बार निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर महिलाओं द्वारा की गई शिकायत की जांच में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षक का एक स्थायी इन्क्रीमेंट भी रोका गया था। इसके बावजूद उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाना सवालों के घेरे में है। मामले पर अब शिक्षा विभाग का भी चौंकाने वाला बयान सामने आया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस सम्मान के लिए उनकी ओर से किसी भी शिक्षक का नाम प्रस्तावित नहीं किया गया था। विभाग का दावा है कि जब मंच से उक्त शिक्षक का नाम उत्कृष्ट कार्य के लिए घोषित हुआ, तो शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हैरत में पड़ गए कि आखिर यह नाम किसने और किस आधार पर प्रस्तावित कर दिया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि विभाग की ओर से नाम नहीं भेजा गया, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक है। फिलहाल पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि शिक्षक का नाम सम्मान सूची में किस स्तर से जोड़ा गया। शिकायतकर्ता रामेश्वर लक्षणे ने मांग की है कि न केवल शिक्षक के सम्मान को निरस्त किया जाए, बल्कि नाम की अनुशंसा करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो। यह मामला अब केवल एक प्रशंसा पत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर उत्कृष्ट की परिभाषा तय कौन कर रहा है और जवाबदेही किसकी है।
इनका कहना

  • हमारी तरफ से किसी भी शिक्षक का नाम 26 जनवरी पर सम्मान लिए प्रस्तावित नहीं किया गया है। उन्हें कैसे सम्मानित कर दिया इसकी जानकारी हमें भी नहीं है। मामले की जांच कराई जा रही है।
  • भूपेंद्र वरकड़े, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बैतूल।