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CG Dhan Kharidi: इस जिले में 54 किसानों का धान अटका, 9 हजार किसान अब भी परेशान… सामने आई सिस्टम की बड़ी चूक!

Dhan Kharidi: बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बारगांव और आसपास के गांवों में सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही सामने आई है।

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तकनीकी गलती या जानबूझकर खेल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

तकनीकी गलती या जानबूझकर खेल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG Dhan Kharidi: बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बारगांव और आसपास के गांवों में सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही सामने आई है। भौतिक सत्यापन में हुई तकनीकी और मानवीय त्रुटि के चलते करीब 54 किसान धान बिक्री से वंचित हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन किसानों का 7 हजार क्विंटल से अधिक धान सिस्टम की गड़बड़ी में अटक गया है, जिससे उन्हें लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है।

किसानों का आरोप है कि सत्यापन के बाद डेटा एंट्री में भारी चूक की गई, जिसके कारण उनके धान की वास्तविक मात्रा पोर्टल पर दर्ज ही नहीं हो पाई। आक्रोशित किसानों ने इस मामले में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधार की मांग की है।

CG Dhan Kharidi: 720 हुआ 72 और 207 बना सिर्फ 7 क्विंटल

किसानों ने उदाहरण देते हुए बताया कि योगेश वमा द्वारा पंजीकृत 720 क्विंटल धान ऐप में केवल 72 क्विंटल दर्शाया गया। किसान तखतराम के 207 क्विंटल को घटाकर मात्र मात्र 7 क्विंटल दर्ज कर दिया गया। खाती समिति के किसान लालाराम केवट के खाते में भी सिर्फ 10 प्रतिशत धान का ही टोकन दिख रहा है।

नए फरमान के बाद बिगड़ा मामला

दरअसल, हाल ही में शासन द्वारा जारी निर्देश के तहत जिन किसानों का धान अब तक नहीं बिका था, उनका पटवारी और कृषि विस्तार अधिकारी की ओर से घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया। सत्यापन उपरांत जानकारी मोबाइल ऐप पर अपलोड की जानी थी, लेकिन यहीं सबसे बड़ी गड़बड़ी हो गई।

जानबूझकर गड़बड़ी की आशंका

इस चूक ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। किसानों का संदेह है कि यह गड़बड़ी सरकारी खरीद के आंकड़े कम दिखाने के उद्देश्य से जानबूझकर की गई हो सकती है। स्थिति यह है कि बेमेतरा जिले के चारों ब्लॉकों में 9 हजार से अधिक किसान अब भी धान बेचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

बारगांव के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें मजबूरी में बिचौलियों को औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ेगा। अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण किसानों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।फिलहाल, खाद्य विभाग ने दावा किया है कि सॉफ्टवेयर और डेटा सुधार की प्रक्रिया जारी है। जल्द ही किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार टोकन जारी किए जाएंगे।

क्विंंटल की जगह टन भरने की भूल

जिला खाद्य अधिकारी ओंकार सिंह ठाकुर ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि सत्यापन करने वाले कर्मचारियों ने डेटा फीडिंग के दौरान क्विंटल की जगह ‘टन यूनिट का चयन कर लिया। इस कारण सिस्टम में कुल मात्रा स्वत: कम हो गई और किसानों के टोकन नहीं कट पा रहे हैं।