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Ration Card: राशन कार्ड ई-केवाईसी की समय-सीमा खत्म, 1 लाख से अधिक हितग्राही सूची से बाहर

Ration Card: राशन कार्ड को लेकर ई-केवाईसी सत्यापन की प्रक्रिया की अं​तिम तारीख समाप्त हो गई है। ऐसे में अब 1 लाख से अधिक लोगों पर राशन का संकट मंडरा रहा है…

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1 लाख से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी लंबित ( Photo - Patrika )

Ration Card: बेमेतरा जिले में शत-प्रतिशत राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी सत्यापन कराने का लक्ष्य एक बार फिर अधूरा रह गया है। शासन द्वारा बार-बार मियाद बढ़ाए जाने और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद जिले के 99 हजार से अधिक ग्रामीण और शहरी हितग्राहियों ने अब तक अपना प्रमाणीकरण नहीं कराया है। पिछले वित्तीय वर्ष के भीतर ही इस महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी जिले में अभी 1,07,552 हितग्राही ई-केवाईसी की प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हैं।

Ration Card: जागरूकता की कमी

शासन की मुख्य मंशा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े को रोककर वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी बाधाओं और स्थानीय स्तर पर जागरूकता की कमी के कारण यह प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। बेमेतरा जिले के चारों जनपद क्षेत्रों और नगरीय निकायों को मिलाकर कुल 9,65,235 हितग्राहियों का सत्यापन किया जाना प्रस्तावित था। मामले में जिला खाद्य अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास किया पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

चारों ब्लॉक में औसत 18 से 24 हजार ई केवाईसी लंबित

जिले के चारों जनपद क्षेत्रों बेमेतरा, साजा, नवागढ़ और बेरला में अभी भी औसत 18 से 24 हजार के बीच ई-केवाईसी लंबित है। ग्रामीण क्षेत्रों में फिंगरप्रिंट न आने, सर्वर की धीमी गति और आधार कार्ड में नाम या उम्र की त्रुटि जैसी तकनीकी समस्याओं के कारण गति काफी धीमी बनी हुई है। इसके अलावा, कई हितग्राही रोजी-रोटी के लिए जिले से बाहर प्रवास पर हैं, जो एक बड़ी बाधा है। यदि बेमेतरा जिले के 1 लाख से अधिक शेष हितग्राही समय रहते जागरूक नहीं हुए और नजदीकी उचित मूल्य की दुकान पर जाकर अपना अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण नहीं कराया, तो आने वाले वित्तीय सत्र में उनके राशन कार्ड केवल एक पहचान पत्र बनकर रह जाएंगे और उन्हें मिलने वाली रियायती खाद्य सामग्री हमेशा के लिए बंद हो सकती है।

राशन आवंटन पूरी तरह रोक दिया गया

विभागीय सूत्रों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के अनुसार, जनवरी और फरवरी माह के दौरान उन सदस्यों का खाद्यान्न आवंटन पूरी तरह रोक दिया गया था, जिन्होंने सत्यापन नहीं कराया था। वर्तमान में राशन दुकानों पर केवल उन्हीं सदस्यों के हिस्से का चावल, शक्कर और अन्य सामग्री प्रदान की जा रही है, जिनका आधार प्रमाणीकरण हो चुका है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जो लोग जानबूझकर इस प्रक्रिया से बच रहे हैं, उनके नाम राशन कार्ड से स्थायी रूप से विलोपित (हटा) दिए जाएंगे।

सत्यापन न हो पाना चिंता का विषय

इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के विशाल नेटवर्क के अंतर्गत 8,68,583 हितग्राहियों में से अब तक 7,74,026 का ही सत्यापन हो सका है, जबकि 94,557 सदस्य अभी भी शेष हैं। इसी तरह जिले के शहरी क्षेत्रों के 96,652 कुल हितग्राहियों में से 83,657 की ई-केवाईसी की गई है है और लगभग 12,995 सदस्य इस अनिवार्य प्रक्रिया से दूर हैं। जिले में व्यापक स्तर पर चलाए गए जनसंपर्क अभियानों और मुनादी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सत्यापन न हो पाना खाद्य विभाग और जिला प्रशासन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

कुल खाद्यान्न आवंटन के कोटे पर पड़ा असर

पूर्व में जिले की मांग और जनसंख्या के आधार पर लगभग 9 लाख क्ंिवटल चावल का आवंटन प्राप्त होता था, जो ई-केवाईसी की कमी के कारण अब घटकर 8 लाख 50 हजार क्विंटल के आसपास रह गया है। वर्तमान में प्रचलित नियमों के तहत प्राथमिकता वर्ग में एकल सदस्य वाले कार्ड पर 10 किलो, दो सदस्यों पर 20 किलो और तीन से पांच सदस्यों वाले परिवारों को प्रति माह 35 किलो चावल का प्रावधान है। ई-केवाईसी न कराने वाले सदस्यों की संख्या के अनुपात में इस निर्धारित मात्रा में लगातार कटौती की जा रही है।

हालांकि, जिला प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए निराश्रितों, निशक्तजनों और अंत्योदय श्रेणी के अति-गरीब परिवारों के आवंटन में फिलहाल कोई बड़ी कटौती नहीं की है, लेकिन सामान्य श्रेणी के आवंटन में भारी कमी देखी गई है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक 5 वर्ष में ई-केवाईसी कराना एक अनिवार्य प्रोटोकॉल है ताकि डेटाबेस को अपडेट रखा जा सके और मृत व्यक्तियों या दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके लोगों के नाम सूची से हटाए जा सकें। यह प्रक्रिया एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड की अवधारणा जमीनी स्तर पर सफल हो। जिले के सामने अब मार्च माह के अंत से पहले शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की कड़ी चुनौती है।