
फोटो: पत्रिका
Mahant Parasnath Death Case Update: बाड़मेर जिले के नागाणा थाना क्षेत्र के झाक गांव स्थित करीब 600 वर्ष पुराने झाक मठ के महंत पारसनाथ (57) का शव गुरुवार सुबह टांके में मिला। पुलिस के मुताबिक महंत का कुछ समय से मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले महंत पारसनाथ को दिल का दौरा आया था, जिसके बाद उन्हें जोधपुर के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के बाद मठ लौट आए थे, लेकिन उसके बाद से वे मानसिक तनाव में बताए जा रहे थे।
मामले की सूचना मिलने पर जिला पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रसिंह मीना, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट यथार्थ शेखर, नागाणा थाना प्रभारी अशोक कुमार, ग्रामीण थानाधिकारी विक्रमदान चारण तथा डीएसपी रमेश कुमार शर्मा भी मौके पर पहुंचे। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। महंत के शिष्य रमेश गिरी और एक अन्य युवक मठ में उनके साथ रहते थे। पूछताछ में सामने आया कि रात करीब डेढ़ बजे तक महंत ने इलाज के लिए लिए गए पैसों का हिसाब बताया और उन्हें लौटाने की बात कही। इसके बाद सभी सो गए और अलसुबह महंत का शव टांके में मिला।
भुरटिया गांव से महंत के भाई के आने के बाद सुबह करीब 11.30 बजे टांके से शव बाहर निकाला गया। परिजनों और साधु-संतों की सहमति से पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया गया और पार्थिव देह उन्हें सुपुर्द कर दी गई।
महंत पारसनाथ करीब 30 वर्षों से झाक मठ के महंत थे। उन्होंने यहां संचालित पद्मनाथ गोशाला के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। गोसेवा, धर्म और सामाजिक सरोकारों में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया और झाक मठ को भव्य स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मठ के निर्माण कार्य के पूर्ण होने के बाद उसके उद्घाटन की उनकी इच्छा थी।
मठ परिसर में महंत की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी गई, जहां भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। हजारों ग्रामीणों और साधु-संतों की उपस्थिति में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मठ परिसर में ही उन्हें समाधि दी गई।
सुसाइड का मामला है। मामले में मर्ग दर्ज कर जांच की जा रही है।
नरेंद्र सिंह मीना, एसपी, बाड़मेर
Updated on:
13 Mar 2026 02:59 pm
Published on:
13 Mar 2026 11:57 am
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