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बरेली पहुंचे निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, यूजीसी नियमों पर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, फिर कर दिया ये ऐलान

सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने और बाद में शासन द्वारा निलंबित किए गए अलंकार अग्निहोत्री अब सरकार और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। वह लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पहुंचे, जहां सवर्ण समाज के प्रमुख लोगों के साथ बैठक कर भविष्य की रणनीति पर मंथन किया गया।

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बरेली। सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने और बाद में शासन द्वारा निलंबित किए गए अलंकार अग्निहोत्री अब सरकार और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। मंगलवार को वह लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पहुंचे, जहां सवर्ण समाज के प्रमुख लोगों के साथ बैठक कर भविष्य की रणनीति पर मंथन किया गया।

बैठक में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के खिलाफ साजिश करार देते हुए इन्हें काला कानून बताया। उन्होंने कहा कि ये नियम शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वाले हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सरकार इन नियमों को वापस नहीं लेती, तब तक देशव्यापी आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार खुद फैला रही समाज में विभाजन: अग्निहोत्री

अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 और एससी-एसटी एक्ट के नाम पर समाज में जानबूझकर विभाजन की राजनीति की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने समाज और सामान्य वर्ग के हक की बात करना आखिर कब से अपराध हो गया। उन्होंने कहा जब हम अपने अधिकारों की बात करते हैं तो हमारे खिलाफ आरोप पत्र थमा दिए जाते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि आवाज दबाने की कोशिश है।

इस्तीफा नहीं, समाज के स्वाभिमान की लड़ाई

अलंकार ने कहा कि उनका इस्तीफा किसी पद से मोहभंग नहीं, बल्कि समाज के स्वाभिमान की रक्षा के लिए लिया गया ऐतिहासिक फैसला है। उन्होंने ऐलान किया कि अब यह लड़ाई सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में आंदोलन का रूप लेगी। बैठक में सुधांशु शर्मा, गजेंद्र पांडे, कौशल सारस्वत, केशव शंखधर, अवनीश चौबे, समर्थ मिश्रा, अनिकेत शर्मा और अविनाश मिश्रा समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को मजबूती देने का संकल्प लिया।