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बड़ी खबर: पाकिस्तान से लौटे MP के प्रसन्नजीत, बहन बोली- भाई भूल गया पुरानी बातें

Prasenjit Rangare Released: पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंचे प्रसन्नजीत रंगारे अब भी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। मीडिया से बातचीत में उनके जवाब भटके हुए दिखे।

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Prasenjit Rangare Released from Pakistani Jail returns balaghat mp news

Prasenjit Rangare Released from Pakistani Jail (Patrika.com)

MP News: पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने देश लौटे बालाघाट जिले के युवक प्रसन्नजीत रंगारे (Prasenjit Rangare) उर्फ सुनील आदे अब परिजनों के बीच हैं, लेकिन उनकी घर वापसी की खुशी के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ गई है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद प्रसन्नजीत अब भी मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। परिजन उनके इलाज और भविष्य को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं।

प्रसन्नजीत ने मीडिया से की बात

शनिवार को महकेपार में अपनी बहन संघमित्रा और जीजा राजेश खोब्रागढ़े के घर पहुंचे प्रसन्नजीत ने मीडिया के सवालों के जवाब दिए। बातचीत के दौरान उन्होंने अपना नाम प्रसन्नजीत रंगारे उर्फ सुनील आदे बताया। पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद कैसा लग रहा है, इस सवाल पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा 'अच्छा'। जेल में व्यवहार, भोजन और कामकाज को लेकर उनके उत्तर सामान्य रहे, लेकिन कई सवालों पर उनके जवाब अस्पष्ट और असंगत नजर आए।

महकेपार को जबलपुर को बताया, बहन बोली- पुरानी बातें भूल गए

जब उनसे पूछा गया कि वे अभी कहां हैं, तो उन्होंने महकेपार को जबलपुर में बताया, जबकि यह बालाघाट जिले में स्थित है। हालांकि राहत की बात यह रही कि वे अपने परिजनों और गांव के लोगों को पहचान पा रहे हैं। बहन संघमित्रा ने बताया कि प्रसन्नजीत कई पुरानी बातें भूल चुके हैं और लंबे समय तक एकाग्र नहीं रह पा रहे हैं।

मां घर पर देख रही बेटे की राह

प्रसन्नजीत के पैतृक गांव खैरलांजी में उनकी मां अब भी बेटे की राह देख रही हैं। परिजन उम्मीद जता रहे हैं कि एक-दो दिन में उन्हें वहां ले जाया जाएगा। बताया गया कि पाकिस्तान की जेल में वे “सुनील आदे” के नाम से बंद थे, इसी कारण वे अब भी अपने नाम के साथ यही पहचान बता रहे हैं। वे पाकिस्तान कैसे पहुंचे, इस सवाल का स्पष्ट जवाब वे नहीं दे पा रहे हैं।

लंबे समय से जेल में रहने के कारण बिगड़ी बी]मानसिक स्थिति

जानकारों के अनुसार, लंबे समय तक कारावास, सामाजिक अलगाव और अनिश्चित परिस्थितियों में रहने से व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। भारत सरकार और राज्य सरकारें ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए जिला अस्पतालों में निशुल्क परामर्श और इलाज की सुविधा देती हैं। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के तहत हर नागरिक को इलाज का अधिकार है।

आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती प्रसन्नजीत का समुचित इलाज और पुनर्वास है। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ भले ही घर पर जुट रही हो, लेकिन परिजनों के चेहरों पर बेटे और भाई के भविष्य को लेकर चिंता साफ झलक रही है। (MP News)