
नदी किनारे बसे गांवों में टोकन के जरिए रेत कारोबारी बढ़ा रहे रेत का कारोबार
लालबर्रा क्षेत्र से प्रवाहित होने वाली वैनगंगा नदी और सर्राटी नदी से रेत कारोबारी अवैध रूप से रेत का खनन कर परिवहन करने में लगे हंै। नदी से रोजाना सैकड़ों ट्राली रेत निकाली जा रही है, इसके बावजूद जिम्मेदार सबकुछ जानकर अनजान बने हैं।
खनन इतना हो गया है कि कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हंै। ये गड्ढे वर्षाकाल में किसानों के लिए आफर साबित हो सकते हैं। दरअसल इन दिनों नदियों के साथ ही विभिन्न राजस्व नालों से भी रेत कारोबारी रेत का अवैध उत्खनन खनन व परिवहन जोरों से कर रहे हंै। पिछले दो माह से यह लगातार बेखौफ तरीके से इस काले कारोबार को तेजी से बढ़ाने में जुटे हंै। इधर इन पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से इनके हौसले बुलंद हो गए हैं।
रेत खनन व परिवहन को लेकर जिम्मेदारों के संज्ञान में मामला लाने पर कभी कभार छूटपुट कार्रवाई कर अपनी औपचारिकता निभा लेते हैं। लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करते हंै। ऐसे में अवैध कारोबार क्षेत्र में दिन प्रतिदिन फलने फूलने लगा है।
ग्राम छिंदलई स्थित वैनगंगा रेत घाट में रेत माफियाओं की अवैध गतिविधियों का केंद्र बना है। यहां से रोजाना दर्जनों ट्रैक्टरों के जरिए बेखौफ रेत का खनन व परिवहन हो रहा है। इसके अलावा सर्राटी नदी के पनबिहरी में गाय घाट से लेकर गढ़वाल भवन तक सहित ग्राम खारी, देवरी, खामघाट, खिर्री, ददिया, आमघाट में रेत का अवैध खनन व ट्रैक्टरों से परिवहन किया जा रहा है। स्थानीयजनों के अनुसार विभाग यदि संबंधित स्थलों की नदियों का मुआयना करें, तो यह कारनामा साफ नजर आएगा कि कितनी बड़ी मात्रा में अवैध खनन कर राजस्व संपदा समेत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
रेत ठेकेदार नदी, नालों किनारे बसे ग्रामों में जाकर वहां ट्रैक्टर वालों से 2000 रायल्टी के साथ 1600 के दो टोकन का सौदा करते हैं। फिर उन्हें काम सौंपकर राजस्व नालों से भी अवैध रेत खनन करवाते हैं। लेकिन प्रशासन इस अवैध काम पर अपनी मौन स्वीकृति प्रदान कर चुप्पी साधे बैठना भी इनकी मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।
बता दें कि पिछले माह 23 दिसंबर को खनिज निरीक्षक सुरेश कुलस्ते ने छिंदलई घाट का निरीक्षण किया था। जिसमें घाट के स्वीकृत न होने की पुष्टि करते हुए विभाग ने जेसीबी के माध्यम से नदी पहुंच मार्गों पर गहरा ट्रेंच खुदवा दिया था, ताकि ट्रैक्टर या अन्य वाहन रेत भरने के लिए नदी तक न पहुंच सकें। इसके बाद भी खनिज विभाग द्वारा खोदी गई ट्रेंच को रेत कारोबारियों ने मिट्टी और मलबे से भरकर पुन: समतल कर दिया हैं। इससे रेत कारोबारी न केवल शासन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि विभाग के तरफ से बंद किए गए रास्ते को दोबारा खोलकर सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती देने में लगे हंै।
क्षेत्र में बिना किसी वैध अनुमति के जगह-जगह हो रहे, इस अवैध रेत उत्खनन से शासन को लाखों के राजस्व की हानि हो रही है, वहीं नदियों व नालों का प्राकृतिक स्वरूप भी तेजी से बिगड़ रहा है।
नदी व नालों से रेत कारोबारी यदि अवैध रूप से रेत निकाल रहे हैं, तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। हमें जहां की सूचना मिलती है, वहां अमले के साथ अवश्य कार्रवाई करते है। रेत कारोबारी ने बंद किए रास्तों को फिर से समतल कर चालू किया है, उस जगह से गुजरने वाले वाहनों पर भी कड़ी नजर रहेगी।
भूपेंद्र अहिरवार, तहसीलदार लालबर्रा
Published on:
18 Jan 2026 01:28 pm
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