Indian Victims: म्यांमार के साइबर ठगी केंद्रों में फंसे 2400 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अभी भी 150 लोगों के वहां फंसे होने की आशंका है और उन्हें बचाने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।
Human Trafficking: भारत सरकार ने विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को बचाने के लिए एक बड़ा और सफल अभियान चलाया है। पिछले डेढ़ साल में, म्यांमार में खतरनाक साइबर धोखाधड़ी के अड्डों में फंसे 2,411 भारतीयों को सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि अभी भी 150 से अधिक भारतीय इन अड्डों में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने यह अहम जानकारी शेयर की ।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि इन भारतीय युवाओं को आकर्षक नौकरियों का लालच देकर फंसाया जाता है। यह एक तरह की मानव तस्करी है, जहां लोगों को तीसरे देशों (जैसे थाईलैंड या कंबोडिया) के रास्ते म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में ले जाया जाता है। म्यांमार के म्यावाड्डी क्षेत्र में स्थित 'केके पार्क' इस तरह के ऑनलाइन अपराधों का एक कुख्यात गढ़ बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे इलाके पर चीनी आपराधिक गिरोहों का कब्जा है, जिन्हें म्यांमार के कुछ स्थानीय हथियारबंद गुटों का समर्थन हासिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद आयोजित विशेष ब्रीफिंग में विदेश सचिव ने बताया कि भारत लगातार म्यांमार सरकार के संपर्क में है। दोनों देशों के बीच हुई इस बैठक में साइबर धोखाधड़ी और भारतीयों की सुरक्षित वापसी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
विदेश सचिव मिसरी ने इस बात पर जोर दिया कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल दो देशों के बीच बातचीत काफी नहीं है। चूंकि इसमें कई देशों की सीमाएं और नेटवर्क शामिल हैं, इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट को तोड़ने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सहयोग और मजबूत सुरक्षा रणनीतियों की जरूरत है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि जो 150 नागरिक अभी भी फंसे हुए हैं, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार के इस बड़े रैस्क्यू ऑपरेशन की सराहना की है। हालांकि, उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से मिलने वाले 'विदेश में हाई-सैलरी जॉब' के विज्ञापनों पर आंख मूंद कर भरोसा न करें।(इनपुट: ANI)