भारत, Jun 01, 2026
Indian Army Divyastra : भारत की डिफेंस पॉवर में एक और शानदार अध्याय जुड़ गया है। भारतीय सेना ने 'मेक इन इंडिया' पहल को एक बहुत बड़ा बूस्ट देते हुए, अपने नए स्वदेशी सर्विलांस सिस्टम 'दिव्यास्त्र मार्क-1' का सफलता के साथ परीक्षण किया है। खासियत यह है कि यह कोई आम हथियार नहीं है, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाने और सरहद की निगरानी करने के लिए बनाया गया एक बहुत आधुनिक और अचूक उपकरण है। यह भारतीय सेना की नई 'तीसरी आंख' है, जिससे बच कर निकलना अब किसी भी घुसपैठिये या दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा।
'दिव्यास्त्र मार्क-1' पूरी तरह से भारत में विकसित एक उन्नत इंटेलिजेंस और सर्विलांस प्रणाली है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दिन के उजाले से लेकर घुप्प अंधेरे तक, हर मौसम में दुश्मन की हर हरकत को बारीकी से पकड़ सके। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेटेस्ट सेंसर्स से लैस है। इसका मुख्य काम सीमा पार होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करना, दुश्मन के ठिकानों की सटीक जानकारी जुटाना और रियल-टाइम डेटा सेना के कमांड सेंटर तक पहुंचाना है।
अब तक भारतीय सेना ऐसे हाई-टेक सर्विलांस उपकरणों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहती थी। लेकिन 'दिव्यास्त्र' का निर्माण आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। स्वदेशी तकनीक होने के कारण न सिर्फ इसके रखरखाव का खर्च कम होगा, बल्कि दुश्मन इस तकनीक को हैक या डिकोड भी नहीं कर पाएगा। इससे भारत के रक्षा क्षेत्र से जुड़ी घरेलू कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को भी एक नई दिशा और हौसला मिला है।
चीन और पाकिस्तान के साथ सटी सीमाओं पर हर पल चौकसी बरतना एक बड़ी चुनौती रही है। 'दिव्यास्त्र एमके-1' के आ जाने से इस चुनौती का समाधान काफी हद तक हो जाएगा। यह सिस्टम घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और बर्फीले इलाकों में भी आसानी से काम कर सकता है। अगर दुश्मन छिपकर कोई घुसपैठ करने की कोशिश करेगा, तो दिव्यास्त्र तुरंत उसकी लोकेशन ट्रेस करके भारतीय जवानों को अलर्ट भेज देगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 'दिव्यास्त्र एमके-1' का सफल परीक्षण भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में एक 'गेम चेंजर' साबित होगा। उनका कहना है कि आज के युद्ध हथियारों से ज्यादा खुफिया जानकारी पर लड़े जाते हैं, और दिव्यास्त्र इसमें सेना को एकतरफा बढ़त दिलाएगा।
सेना से जुड़े सूत्रों ने इस परीक्षण पर खुशी जताते हुए कहा कि यह तकनीक जवानों के लिए एक बड़े मददगार के रूप में सामने आएगी, जिससे गश्त के दौरान होने वाले जोखिमों को कम किया जा सकेगा।
परीक्षण के सफल होने के बाद, अब अगला कदम 'दिव्यास्त्र एमके-1' के बड़े पैमाने पर उत्पादन का होगा। रक्षा मंत्रालय जल्द ही भारतीय कंपनियों को इस स्वदेशी सिस्टम की बड़ी खेप तैयार करने का ऑर्डर दे सकता है। इसके अलावा, सेना इसके अगले और अधिक उन्नत संस्करण जैसे पर भी रिसर्च और डवलपमेंट का काम शुरू कर सकती है। आने वाले महीनों में इसे कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसी संवेदनशील सीमाओं पर तैनात किया जा सकता है।
बहरहाल इस सफल परीक्षण ने साबित कर दिया है कि भारतीय सेना अब भविष्य के हाई-टेक युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार है। सेना जल्द ही इसे अग्रिम मोर्चों पर तैनात करने की योजना बना रही है, जिससे देश की सुरक्षा की दीवार और भी अभेद्य हो जाएगी।
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Published on: 01 Jun 2026 04:45 pm


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