Iran US Tension: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के इस्तीफे को लेकर फैली खबरों को ईरानी सरकार और कई एजेंसियों ने पूरी तरह झूठा बताया और खारिज कर दिया है।
Iranian President Masoud Pezeshkian: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सीजफायर वार्ताओं के बीच ईरान की राजनीति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, यह दावा अब आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया गया है और इसे पूरी तरह भ्रामक बताया जा रहा है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ईरान इंटरनेशनल (Iran International) के हवाले से कहा गया कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने रविवार (31 मई) को कथित तौर पर अपना इस्तीफा सौंप दिया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि उन्होंने इस्तीफे के पीछे देश की सत्ता संरचना और विशेषकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते प्रभाव को कारण बताया। इन दावों के अनुसार, राष्ट्रपति ने कथित रूप से कहा था कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में सरकार की भूमिका सीमित हो गई है और कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव बढ़ गया है।
इन सभी दावों को ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज एजेंसी (Tasnim News Agency) ने सिरे से खारिज कर दिया है। एजेंसी ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने न तो इस्तीफा दिया है और न ही पद छोड़ने का कोई निर्णय लिया है। वे पूरी तरह से अपने कार्यभार का निर्वहन कर रहे हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय के सूचना एवं संचार विभाग के उप प्रमुख सैयद मेहदी तबतबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए इन खबरों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान जनता की सेवा से पीछे हटने वाले नहीं हैं और ऐसी खबरें चल रहे कूटनीतिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश हैं।
तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू एजेंसी (Anadolu Agency) ने भी इन इस्तीफे संबंधी दावों को खारिज किया है और कहा है कि अब तक किसी आधिकारिक स्रोत ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और संभावित सीजफायर को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं जारी हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) और उनके परिवार, जिनमें मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) जैसे प्रभावशाली नाम भी शामिल हैं, के इर्द-गिर्द सत्ता संरचना और प्रभाव को लेकर अक्सर राजनीतिक बहसें होती रही हैं।