राजसमंद के दरीबा में 46.58 करोड़ रुपए की लागत से 220 केवी जीएसएस शुरू किया गया है, जिससे दक्षिण राजस्थान की बिजली व्यवस्था मजबूत होगी। इससे दरीबा, मावली, फतेहनगर सहित Udaipur संभाग के कई क्षेत्रों में वोल्टेज समस्या और बिजली कटौती में राहत मिलेगी। करीब 30 से 40 मेगावाट भार राहत मिलने से किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योगों को स्थिर बिजली आपूर्ति का फायदा होगा।
उदयपुर. दक्षिण राजस्थान की बिजली व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम की ओर से राजसमंद के दरीबा क्षेत्र में 46.58 करोड़ रुपए की लागत से 220 केवी ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है।
नए जीएसएस के संचालन से दरीबा, रेलमगरा, मावली, फतेहनगर और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से बनी वोल्टेज समस्या तथा बार-बार होने वाले विद्युत व्यवधानों से राहत मिलेगी। इसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं, किसानों और औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा। बढ़ती बिजली मांग के बीच यह परियोजना दक्षिण राजस्थान के विद्युत नेटवर्क को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेगी।विद्युत प्रसारण निगम के अनुसार क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे बिजली भार और सीमित ट्रांसमिशन क्षमता के कारण लोड शेडिंग तथा बिजली संकट की स्थिति बन रही थी। जीएसएस दरीबा के चालू होने से विद्युत भार संतुलन बेहतर होगा और ट्रांसमिशन नेटवर्क को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा। इससे विद्युत आपूर्ति अधिक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण हो सकेगी।
30 से 40 मेगावाट तक भार राहत मिलेगी
विशेष रूप से उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सलूम्बर जिलों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की संभावना है। नए जीएसएस के माध्यम से लगभग 30 से 40 मेगावाट तक भार राहत मिलेगी, जिससे गर्मी के मौसम में बिजली कटौती कम होने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
किसानों और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में कम वोल्टेज और बार-बार बिजली ट्रिपिंग से सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहे थे। वहीं औद्योगिक इकाइयों को भी उत्पादन में परेशानी उठानी पड़ रही थी। नए जीएसएस से बिजली आपूर्ति स्थिर होने पर कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को राहत मिलेगी।
बढ़ती मांग के बीच मजबूत हुआ नेटवर्क
दक्षिण राजस्थान में तेजी से बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव लगातार बढ़ रहा था। जीएसएस दरीबा शुरू होने से अतिरिक्त लोड को संतुलित करने में मदद मिलेगी और भविष्य की बढ़ती विद्युत मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।