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‘जान जाते-जाते बची….’, विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने वाली अंजना ने जब मौत को करीब से देखा

Raisen Anjana Yadav who climbed Mount Everest: रायसेन के छोटे से गांव सेमरी से निकली अंजना यादव ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर देश के साथ रायसेन का नाम रोशन किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान अंजना ने एक भयावह घटना का जिक्र किया।

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Raisen Anjana Yadav who climbed Mount Everest (SOURCE: @bhopalcomm )

Anjana Yadav who climbed Mount Everest: मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के छोटे से गांव सेमरी की बेटी अंजना यादव ने साबित कर दिया कि हौसलों के आगे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भी छोटी पड़ जाती है। नौ वर्षों तक संजोए गए सपने को साकार करते हुए अंजना ने 27 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) की चोटी पर तिरंगा फहराकर नया इतिहास रच दिया।

रायसेन से माउंट एवरेस्ट तक

रायसेन जिले के दीवानगंज के छोटे से गांव सेमरी से निकली अंजना यादव ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर देश के साथ रायसेन का नाम रोशन किया है। पर्वतारोही अंजना यादव ने 27 मई को सुबह 5.24 बजे 8848.86 मीटर ऊंची चोटी को सफलतापूर्वक फतह किया। एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचना उनकी अथक मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

लोगों से साझा की अपनी यात्रा

भोपाल के निजी होटल में आयोजित मीडिया संवाद में अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही अंजना ने अपनी प्रेरक यात्रा साझा करते हुए कहा कि एवरेस्ट की राह केवल पहाड़ की चढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा है। उन्होंने बताया कि 3 अप्रेल को काठमांडू रवाना होने के बाद 7 अप्रैल से बेस कैंप की यात्रा शुरू हुई।

अंजना यादव बोलीं- 'मौत ने मुझे गहरा सदमा पहुंचाया...'

एवरेस्ट फतह करने के दौरान अंजना यादव को गहरा सदमा लगा। उन्होंने बताया कि इस सीज़न एवरेस्ट पर मेरे कई भारतीय साथियों की मौत हुई। इनकी मौत ने मुझे गहरा सदमा पहुंचाया है। मीडिया से बातचीत के दौरान अंजना यादव ने एक भयावह घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि, मैं हिलेरी स्टेप पर बाल-बाल एक खतरनाक दुर्घटना से बचीं, जिसमें मेरी जान जाते-जाते बची।

बताया चुनौती भरे सफर का अनुभव

खुम्बू आइसफॉल, बर्फीली हवाएं, माइनस तापमान और कम होती ऑक्सीजन के बीच हर कदम चुनौती बन गया था। अंजना ने बताया कि खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण उन्हें करीब सात हजार मीटर की ऊंचाई से वापस लौटना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दोबारा प्रयास करते हुए आखिरकार 27 मई की सुबह पांच बजे वे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचीं।

ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना को समर्पित की उपलब्धि

उन्होंने अपनी यह उपलब्धि ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के साहस को समर्पित की। वर्ष 2018 में पर्वतारोहण को जीवन का लक्ष्य बनाने वाली अंजना अब प्रदेश के ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों के बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेंगी। इस अवसर पर उनके मेंटर हरिओम जटिया ने कहा कि अंजना का संघर्ष और सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल है।