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CG Vyapam: अधजल गगरी छलकत जाए का अर्थ क्या? प्री-डीएलएड परीक्षा में आया रोचक सवाल, स्टूडेंट्स हुए कन्फ्यूज

CG Vyapam: प्री-डीएलएड परीक्षा में हिंदी सेक्शन में पूछी गई लोकोक्ति “अधजल गगरी छलकत जाए” का अर्थ भी कैंडिडेट्स के लिए रोचक और थोड़ा कन्फ्यूजिंग सवाल बन गया, जिससे परीक्षा का स्तर और चुनौतीपूर्ण नजर आया।

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स्टूडेंट्स हुए कन्फ्यूज (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ताबीर हुसैन। CG Vyapam: राजधानी के 28 सेंटर समेत सभी जिलों में गुरुवार को आयोजित प्री-डीएलएड परीक्षा का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ में उपस्थिति 77 प्रतिशत रही बल्कि रायपुर जिले में 67 फीसदी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। जानकारों की मानें तो इस बार का क्वेश्चन पेपर इस बार ट्रेडिशनल ढर्रे से हटकर पूरी तरह कॉन्सेप्चुअल और एनालिटिकल पैटर्न पर बेस्ड था।

प्री-डीएलएड परीक्षा में आया रोचक सवाल

परीक्षा देकर निकले कैंडिडेट्स के मुताबिक, इस बार सीधे और आसान सवालों के बजाय मैच द कॉलम और असर्शन रीजन वाले मल्टी-लेवल मुश्किल सवालों की संख्या ज्यादा थी। इसने परीक्षार्थियों की गहरी समझ और टाइम मैनेजमेंट का कड़ा इम्तिहान लिया। एक्सपर्ट होरी कुमार ने बताया कि जनरल मेंटल एबिलिटी सेक्शन में सीधे दूरी या विस्थापन पूछने के बजाय कई स्टेटमेंट्स देकर डायरेक्शन की शुद्धता को परखा गया था।

इसके अलावा सीरीज में मिसिंग वर्ड्स को बढ़ते क्रम में सेट करने जैसे लॉजिकल सवाल पूछे गए थे। नेगेटिव मार्किंग नहीं थी, जिससे कैंडिडेट्स को बड़ी राहत मिली और उन्होंने ओएमआर शीट पर पूरे 100 सवाल अटेंप्ट किए। हिंदी सेक्शन में अधजल गगरी छलकत जाए लोकोक्ति का अर्थ पूछा गया।

जियोग्राफी और हिस्ट्री

जनरल नॉलेज सेक्शन में भी काफी हाई एजुकेशनल स्टैंडर्ड देखने को मिला। नीति आयोग, पंचवर्षीय योजना और फाइनेंस कमीशन को उनके स्पेसिफिक काम और टैक्स डिस्ट्रीब्यूशन से जोडऩे वाले सवाल आए थे। जियोग्राफी और हिस्ट्री में भी यही पैटर्न दिखा, जहां देश के प्रेसिडेंट्स को उनके कार्यकाल और स्टेट्स को फॉरेस्ट कवर के घटते क्रम में अरेंज करना था।

साइंस और लिटरेचर सेक्शन में न्यूटन, आइंस्टीन, डार्विन जैसे साइंटिस्ट्स के प्रिंसिपल्स और 'विंग्स ऑफ फायर' व 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' जैसी मशहूर किताबों का मिलान पूछा गया था। वहीं टीचिंग एप्टीट्यूड में डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया जैसी 'लर्निंग डिसेबिलिटीज' और एनसीईआरटी के रोल पर बेस्ड प्रैक्टिकल सवाल छाए रहे।

कैंडिडेट्स रिव्यू

  • मैंने दूसरी बार एग्जाम दिया है। पिछली बार की तुलना में यह पेपर अच्छा गया। - भूमिका
  • यह मेरा पहला अनुभव रहा। जिस हिसाब से मैंने पढ़ाई की थी, ठीक गया पेपर। - विद्या पटेल
  • मैंने दूसरी बार परीक्षा दी है। मुझे पेपर टफ लगा। खासतौर पर कथन वाले सवाल। - प्रवीण मरकाम

कई स्टूडेंट्स कन्फ्यूज

प्री-डीएलएड परीक्षा में इस बार पैटर्न पूरी तरह बदलकर कॉन्सेप्चुअल और एनालिटिकल हो गया, जिससे अभ्यर्थियों को सीधे जवाबों की जगह सोच-समझ वाले सवालों का सामना करना पड़ा। हिंदी सेक्शन में पूछी गई लोकोक्ति “अधजल गगरी छलकत जाए” ने भी कई स्टूडेंट्स को कन्फ्यूज किया, क्योंकि पेपर में मैच द कॉलम, असर्शन-रीजन और लॉजिकल टाइप सवालों की भरमार रही। कुल मिलाकर परीक्षा आसान नहीं थी, लेकिन नकारात्मक अंकन न होने से अभ्यर्थियों ने सभी सवाल अटेम्प्ट किए और पेपर को मिला-जुला अनुभव बताया।