Census 2027: छत्तीसगढ़ में साक्षरता को लेकर सामने आए अनुमानित आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 1 मार्च 2027 तक प्रदेश में 1 करोड़ 4 लाख से अधिक लोग निरक्षर हैं। वहीं, नक्सल प्रभावित कई जिलों में साक्षरता दर चिंता का विषय बनी हुई है।
रायपुर@राहुल जैन। Chhattisgarh Literacy Rate 2027: छत्तीसगढ़ में जनगणना का एक चरण पूरा हो गया है। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू हो सकता है, लेकिन इससे पहले प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के अनुमानित आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में 1 मार्च 2027 की स्थिति में 1 करोड़ 4 लाख 51 हजार 679 निरक्षर हैं। यानी इन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता है।
रायपुर जिले की स्थिति कम चौंकाने वाली नहीं है। रायपुर जिले में सबसे अधिक 86.46 फीसदी साक्षरता दर हैं। इसके बावजूद जिले 6 लाख 75 को अक्षर ज्ञान नहीं है। यह हालात जब पूरी सरकार और विभाग के आला अधिकारी इसी जिले में रहते हैं। जनसंख्या के हिसाब से रायपुर सबसे टॉप पर है। माओवाद प्रभावित रहे बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में साक्षरता दर संतोषजनक नहीं है।
विभाग के अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2027 तक छत्तीसगढ़ की कुल आबादी 3 करोड़ 15 लाख 12 हजार 600 है। इनमें से साक्षर लोगों की जनसंख्या 2 करोड़ 10 लाख 60 हजार 921 हैं। इस अंतर को कम करना आने वाले वर्षों में सरकार और शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा। आंकड़े बताते हैं कि बड़े और अधिक आबादी वाले जिलों में निरक्षरों की संख्या अब भी काफी अधिक है, जबकि कुछ छोटे जिलों में यह संख्या अपेक्षाकृत कम है।
फैक्ट फाइल
सर्वाधिक निरक्षर जनसंख्या वाले 5 जिले
जिला-निरक्षर जनसंख्या
सबसे कम साक्षर जनसंख्या वाले 5 जिले
जिला- साक्षर जनसंख्या
आंकड़ों में महिला और पुरुषों की साक्षरता दर में काफी असमानता नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ में पुरुष साक्षरता की दर 83.01 फीसदी है, जबकि महिला साक्षरता की दर 68.16 फीसदी है। महिला निरक्षर की कुल संख्या 62.22 लाख हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 42.28 लाख हैं।
साक्षरता दर बढ़ाने के लिए राज्य सरकार अभियान शुरू कर रही है। इसमें निरक्षरों का पूरा डेटा हाईटेक तरीके से मोबाइल ऐप पर अपलोड किया जाएगा। सरकार के अभियान का उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे वयस्क नागरिकों को सशक्त बनाना है, जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है। योजना के अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान के साथ-साथ जीवन कौशल, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, व्यावसायिक कौशल तथा बुनियादी शिक्षा का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
असाक्षर व्यक्तियों की पहचान के लिए घर-घर सर्वेक्षण अभियान शुरू होगा। सर्वेक्षण कार्य निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से पूर्ण किए जाने के बाद उल्लास मोबाइल ऐप के जरिए स्वयंसेवी शिक्षकों एवं असाक्षरों का चिन्हांकन और ऑनलाइन प्रविष्टि की जाएगी। साथ ही पारा, टोला एवं मोहल्ला स्तर पर 8 से 10 असाक्षरों के लिए एक साक्षरता केंद्र स्थापित होगा।
अक्षर ज्ञान रखने वाला या पढ़ा-लिखा' व्यक्ति। सरल शब्दों में वह व्यक्ति जो किसी भी भाषा में अपना नाम लिख सकता है और लिखी हुई बात को समझकर पढ़ सकता है, उसे साक्षर कहा जाता है।
उन व्यक्तियों को कहा जाता है जो किसी भी भाषा में पढ़ या लिख नहीं सकते। सामान्य शब्दों में, जो लोग अक्षरों का ज्ञान नहीं रखते और जिन्हें शिक्षा या औपचारिक पढ़ाई का अवसर नहीं मिला है, उन्हें निरक्षर या अनपढ़ कहा जाता है।