# रायपुर

शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन! छत्तीसगढ़ के कई शिक्षकों का वेतन रुका, 38 अधिकारियों को नोटिस जारी

Chhattisgarh Education Department: छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण के बाद नए स्कूलों में जॉइन नहीं करने वाले 273 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। वहीं कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर 5 जेडी और 33 डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

2 min read
Chhattisgarh Education Department(photo-patrika)

Chhattisgarh Education Department: छत्तीसगढ़ में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद नई पदस्थापना वाले विद्यालयों में समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने ऐसे 273 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने पर 5 संभागीय संयुक्त संचालकों (जेडी) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने अधिकारियों से तीन दिन में कार्रवाई प्रतिवेदन और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Chhattisgarh Education Department: अधिकारियों की लापरवाही पर विभाग सख्त

संचालनालय ने कहा है कि कई बार निर्देश देने के बावजूद अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों ने संचालनालय को तथ्यात्मक जानकारी और आवश्यक दस्तावेज भी नहीं भेजे। इसे अधिकारियों की जिम्मेदारियों के निर्वहन में शिथिलता माना गया है। विभाग ने पूछा है कि इस लापरवाही के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

तीन दिन में रिपोर्ट, एक सप्ताह में जवाब

डीपीआई ने निर्देश दिया है कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों और व्याख्याताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर भेजी जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर मामला शासन को भेजा जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सबसे ज्यादा 134 प्राथमिक शिक्षक अनुपस्थित

युक्तियुक्तकरण के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों ने नई पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 273 से अधिक शिक्षक और अधिकारी अब तक जॉइन नहीं हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 134 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 71 व्याख्याता, 42 शिक्षक (वर्ग-2), 15 प्रधान पाठक और एक प्राचार्य ने भी नए स्कूलों में पदभार नहीं संभाला है। विभाग का मानना है कि इससे युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों को झटका लग रहा है।

शिक्षकविहीन स्कूलों की समस्या दूर करना है उद्देश्य

राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया है। इस प्रक्रिया में 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया गया है। विभाग का कहना है कि पदस्थापना के बाद भी शिक्षकों का कार्यभार ग्रहण नहीं करना युक्तियुक्तकरण के उद्देश्य को प्रभावित कर रहा है और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।

जवाब नहीं देने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, उनसे जवाब मांगा गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।