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क्या आपको भी बिजली काटने की दी जा रही धमकी! ऐसा नहीं कर सकता विभाग, जानें इलाहबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

Allahabad high court news : यदि आपको भी बिजली विभाग की तरफ से कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है तो यह खबर आपके लिए है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बिजली काटने की धमकी देकर वसूली नहीं कर सकता।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट (Image: IANS)

प्रयागराज: यदि आपको भी बिजली विभाग की तरफ से कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है तो यह खबर आपके लिए है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बिजली काटने की धमकी देकर वसूली नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विभाग पुरानी बिलिंग के आधार पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त मांग कर सकता है, लेकिन उसे बिजली काटने का अधिकार नहीं है।

मामले के लिए दीवानी तरीका अपनाना चाहिए

न्यायमूर्ति अरिंदम सिंह और सत्यवीर सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए विभाग को कहा है कि इस तरह की राशि की वसूली के लिए दीवानी तरीका ही अपनाया जा सकता है। दरअसल, इसी तरह के मामले को लेकर ओम फूड मैन्युफैक्चरिंग केंद्र की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी।

कंपनी ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उसके पास कमर्शियल कनेक्शन था और जुलाई 2023 में अचानक से उसका लोड बढ़कर 140 केवी कर दिया गया। कंपनी ने बताया कि इस दौरान बिजली का बिल भी जमा किया जा रहा था, लेकिन विभाग ने 2 साल के बाद कहा कि गलत टैरिफ के आधार पर बिल जनरेट हो रहा है और 54 लाख रुपए की मांग कर दी।

विभाग 15 दिन का नोटिस दे सकता है

कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि बिजली का लोड बढ़ाना उपभोक्ता के हाथ में नहीं बल्कि विभाग के हाथ में होता है। ऐसे में बिजली चोरी भी नहीं की गई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यह विभाग की गलती का नतीजा है। कोर्ट ने कहा है कि बिलिंग में यदि कोई गलती बाद में पता चलती है तो उसके लिए अतिरिक्त मांग की जा सकती है, लेकिन दबाव देकर और धमकी देकर अवैध तरीके से वसूली नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा है कि बिजली विभाग के अधिनियम 2003 की धारा 56 के तहत विभाग उपभोक्ता को 15 दिन का नोटिस दे सकता है, लेकिन 2 वर्ष पुराने मामले को लेकर और रुपए की वसूली को लेकर बिजली नहीं काट सकता। कोर्ट ने कहा है कि उसके साथ ही तय राशि को बढ़ा भी नहीं सकता।

कोर्ट ने कहा कि नोटिस में केवल गलती पकड़ी जाने की बात कही गई थी, लेकिन गलती क्या थी या नहीं बताया गया और बिजली की गणना भी किस आधार पर की गई थी, इसका भी जिक्र नोटिस में नहीं है और यह पारदर्शिता को नहीं दर्शाता। कोर्ट ने कहा है कि यदि केवल बकाया राशि वसूली की बात है तो इसके लिए सिविल उपाय अपनाना चाहिए ना कि बिजली काटना। उसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निरस्त कर दिया।

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