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सर्वे में खुलासाः बचत की दौड़ में बिगड़ रही सेहत, हर 10 में 4 भारतीय तनावग्रस्त

Economic burden: शहरी भारतीयों में बढ़ते वित्तीय दबाव और भविष्य की बचत की दौड़ का मानसिक व शारीरिक सेहत पर पड़ रहा असर। सर्वे में खुलासा हुआ कि हर 10 में 4 लोग तनाव से जूझ रहे हैं।

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देश के 82% शहरी भारतीय किसी न किसी स्तर के तनाव का सामना कर रहे। (Photo- IANS)

financial anxiety: बेहतर भविष्य के लिए बचत और निवेश करने की कोशिश अब शहरी भारतीयों के लिए तनाव का कारण बनती जा रही है। इंडिया हेल्थ कोशिएंट 2026 सर्वे के मुताबिक 41% शहरी भारतीयों का मानना है कि पैसों की चिंता और भविष्य के लक्ष्यों को पाने की होड़ उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। वहीं 36% लोगों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन, सप्लीमेंट्स और नियमित मेडिकल जांच जैसे स्वस्थ जीवन से जुड़े खर्च उनके बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं। सर्वे के अनुसार, भारतीय भविष्य के लिए बचत में तो आगे हैं, लेकिन जब बात अचानक आने वाली मुसीबतों की होती है, तो वे फेल हो जाते हैं।

माता-पिता के मेडिकल खर्चे उठाने में चुनौती

इमरजेंसी फंड बनाए रखने, माता-पिता के अचानक बड़े मेडिकल खर्चों को संभालने और रिटायरमेंट के बाद के खर्चों के लिए लोग आज भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। 50 साल से कम उम्र के लगभग आधे कामकाजी भारतीयों ने माना कि अपने माता-पिता के मेडिकल खर्चों को उठाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है।

क्या है हेल्थ डेट ट्रैप?

वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के आर्थिक तनाव से लोगों की शारीरिक सेहत गिरती है। जब सेहत गिरती है, तो उसे ठीक करने के लिए अच्छे भोजन, सप्लीमेंट्स, डॉक्टरों की फीस और मेडिकल चेक-अप की जरूरत होती है, जिसमें काफी पैसा खर्च होता है। इस खर्च से इंसान का वित्तीय बजट फिर बिगड़ जाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी भारत का समग्र स्वास्थ्य स्कोर 100 में 65 रहा, जिसे 'अच्छी' श्रेणी में रखा गया है। शारीरिक स्वास्थ्य को 68 अंक और सामाजिक स्वास्थ्य को 66 अंक मिले, जबकि वित्तीय स्वास्थ्य सबसे कमजोर क्षेत्र के रूप में उभरा, जिसका स्कोर 62 रहा।

  • 82% शहरी भारतीय तनावग्रस्त
  • सर्वेक्षण में सामने आया है कि देश के 82% शहरी भारतीय किसी न किसी स्तर के तनाव का सामना कर रहे हैं।
  • 14% ने तनाव को असहनीय बताया
  • 20% तनावग्रस्त युवा 25-34 आयु वर्ग के

क्या कहना है विशेषज्ञों का

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए वित्तीय साक्षरता, हेल्थ इंश्योरेंस की बेहतर समझ और इमरजेंसी सेविंग्स फंड बनाना बेहद जरूरी है, ताकि लोग दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा पा सकें।