PM Modi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सलाहकार परिषद) की बैठक की अध्यक्षता कर भारत की अर्थव्यवस्था, विकास रणनीति, निवेश, रोजगार और सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
EAC-PM meeting: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की बैठक की अध्यक्षता कर अर्थव्यवस्था की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की विकास रणनीति पर व्यापक मंथन किया। बैठक में भारत के आर्थिक परिवर्तन, दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और विकसित भारत के संकल्प को गति देने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के मद्देनजर भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उपायों पर भी विचार किया गया। निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन, नवाचार, कौशल विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाने वाली नीतियों पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने निरंतर सुधारों को विकास की गति बनाए रखने की अनिवार्य शर्त बताया।
बैठक में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ को नीति निर्माण का प्रमुख आधार बनाने पर बल दिया गया। परिषद के सदस्यों ने कृषि, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा सुरक्षा और मानव संसाधन विकास से जुड़े सुझाव दिए। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत के आर्थिक परिवर्तन, दीर्घकालिक प्राथमिकताओं और सुधारों को और गति देने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत लगातार दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अस्थिर बना हुआ है।
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही (चौथी तिमाही) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई। यह मजबूत प्रदर्शन मुख्य रूप से कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में दर्ज हुई तेज़ वृद्धि के चलते संभव हुआ है।
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि लंबे समय तक अस्थिरता रहने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर पड़ सकता है।