केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 15 से 18 जून के बीच बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। भाजपा नेतृत्व द्वारा महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारियों के तहत कई राज्य मंत्रियों सहित एक दर्जन से अधिक मंत्रियों को हटाया जा सकता है।
Modi Cabinet Expansion: देश की राजनीति और सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के पहले बड़े कैबिनेट विस्तार और फेरबदल (Union Cabinet Rejig) की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, जून के मध्य (Mid-June) में मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इस बार का फेरबदल केवल प्रशासनिक कसावट के लिए नहीं, बल्कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक संतुलन साधने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस संभावित विस्तार में कई चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं, जिसमें 12 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी से लेकर नए युवा चेहरों को मौका देना शामिल है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कैबिनेट फेरबदल में मौजूदा मंत्रिपरिषद से करीब 12 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इसके पीछे दो मुख्य वजहें बताई जा रही हैं— पहला, मंत्रियों का लचर रिपोर्ट कार्ड (कमजोर परफॉर्मेंस) और दूसरा, संगठन को मजबूत करने के लिए कुछ वरिष्ठ नेताओं को वापस पार्टी के काम में लगाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करते रहे हैं, और माना जा रहा है कि जिन मंत्रालयों में काम की गति धीमी रही है, वहां नए और ऊर्जावान चेहरों को कमान सौंपी जाएगी।
इस कैबिनेट विस्तार का एक और सबसे बड़ा पहलू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों को संतुष्ट करना है। बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों और जेडीयू (JDU) की मांग को देखते हुए नीतीश कुमार की पार्टी को इस बार मोदी कैबिनेट में ज्यादा हिस्सेदारी मिल सकती है। चर्चा है कि जेडीयू को एक से दो नए मंत्री पद या महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जा सकते हैं, जिससे बिहार में एनडीए गठबंधन को और अधिक मजबूती दी जा सके।
इस कैबिनेट फेरबदल की सबसे क्रांतिकारी और चौंकाने वाली खबर यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के शीर्ष नेतृत्व या जमीनी युवा नेताओं को सीधे केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। भाजपा हमेशा से युवाओं को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट में सीधे युवा मोर्चा के कोटे से एंट्री देकर पीएम मोदी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं। इसका उद्देश्य देश के युवा वोटर्स को आकर्षित करना और पार्टी में सेकेंड-लाइन लीडरशिप (भावी नेतृत्व) को तैयार करना है।
जून के मध्य में होने वाले इस कैबिनेट विस्तार में उन राज्यों को विशेष तवज्जो दी जाएगी जहाँ आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। नए चेहरों के चयन में सोशल इंजीनियरिंग (जातीय और क्षेत्रीय समीकरण) का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस फेरबदल के जरिए सरकार न केवल अपनी छवि को और अधिक जन-हितैषी और गतिशील बनाना चाहती है, बल्कि नीतिगत फैसलों की रफ्तार बढ़ाकर 2029 के रोडमैप को भी मजबूत करना चाहती है।