Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के मौजूदा माहौल, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
TMC: ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी से लगातार नेताओं के इस्तीफे हो रहे हैं। सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी को तब लगा जब 60 विधायकों ने पार्टी से बगावत कर दी।अब एक और नेता ने पार्टी से इस्तीफे दे दिया है। शनिवार को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने अपने सभी पदों के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को संबोधित एक लेटर में अपने इस्तीफे की जानकारी दी।
उन्होंने लिखा कि उन्होंने पार्टी और संगठन के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम किया है और हमेशा कार्यकर्ताओं तथा संगठन के हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही, लेकिन लंबे समय तक विचार करने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया। अपने लेटर में सिद्दीकी ने साफ तौर पर कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे सिर्फ व्यक्तिगत कारण ही नहीं हैं, बल्कि पार्टी के मौजूदा माहौल को लेकर उनकी नाराजगी भी एक बड़ी वजह है। उन्होंने दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में कई मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं को वह महत्व नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के बीच निराशा बढ़ी है। सिद्दीकी ने खास तौर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठाए।
आपंको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के 60 विधायकों ने अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को सदन में विपक्ष का नेता बनवा लिया। जबकि ममता बनर्जी ने पहले किसी और नेता को इस पद के लिए चुना था। आपको बता दें कि इससे पहले ऋतब्रत बनर्जी के साथ एक और विधायक को ममता बनर्जी ने पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
आपको बात दें कि विधायकों के बगावत के बाद अब इस बात की चर्चा भी तेज है कि सांसदों में फूट पद सकती है। टीएमसी से निष्कासित नेता रिजु दत्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तकरीबन 20 सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं। साथ ही इस बात की चर्चा जोरों पर है कि दिल्ली में कई सांसद बागी हो सकते हैं।