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Indian Army Upgradation: भारतीय टैंकों को मिलेगी नई ताकत, दुश्मन को खोजकर हमला करेंगे सुसाइड ड्रोन

Indian Army Upgradation: भारतीय सेना के भविष्य के टैंकों में सुसाइड, सर्विलांस और टेथर्ड ड्रोन सिस्टम लगाए जाएंगे। AVNL की इस परियोजना का उद्देश्य टैंकों की मारक क्षमता और निगरानी क्षमता को बढ़ाना है, ताकि दुश्मन के ठिकानों पर अधिक सटीक हमला किया जा सके।

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Indian Tanks Kamikaze Drone Upgrade (AI Image)

Indian Tanks Kamikaze Drone Upgrade: बीते साल हुए ऑपरेशन सिंदूर और अभी जारी रूस-युक्रेन व ईरान युद्ध ने पूरे विश्व की सेनाओं को अपनी तकनीक बदलने को मजबूर कर दिया है। फाइटर जेट हों या मिसाइल, टैंक हों या तोपखाना हर तरफ बदलाव का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) भविष्य के मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) के लिए एडवांस ड्रोन सिस्टम तैयार करने जा रहा है।

ड्रोन सिस्टम के डिजाइन, विकास और आपूर्ति करने के लिए एवीएनएल ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। इसमें एवीएनएल के मुख्य युद्धक टैंक प्लेटफॉर्म के लिए तीन प्रकार के ड्रोन विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। ये बख्तरबंद वाहनों की युद्धक क्षमताओं को बढ़ाएंगे।

खरीदे जाएंगे 590 सिस्टम

दस्तावेज के अनुसार, एवीएनएल विकास चरण के दौरान प्रोटोटाइप के तीन सेट खरीदने की योजना बना रही है। इसके बाद यदि कंपनी का चयन हो जाता है तो उसे फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल (एफआरसीवी) कार्यक्रम के लिए 590 सिस्टम का उत्पादन करना होगा। इसका उद्देश्य भारतीय बख्तरबंद सैन्य इकाइयों की दृष्टि सीमा से परे लक्ष्य भेदन क्षमता को बढ़ाना है।

50 फीसदी स्वदेशी सामग्री अनिवार्य

प्रोटोटाइप चरण में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री अनिवार्य की है, इसे अंतिम उत्पादन बैच तक बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया जाएगा। स्वदेशी डिजाइन और विकास से जुड़े दावों का भौतिक सत्यापन करने का अधिकार भी सुरक्षित रखा है।

ये हैं तीन प्रकार के ड्रोन

लोइटरिंग म्यूनिशन: इसे 'कामिकेज़ ड्रोन' या 'सुसाइड ड्रोन' भी कहा जाता है। ये दुश्मन की तलाश में कुछ देर मंडराने के बाद सटीक जानकारी मिलते ही आत्मघाती हमला करते हैं।

सर्विलांस ड्रोन: ये एडवांस कैमरों और सेंसर से लैस होते हैं। इनका उपयोग वास्तविक समय में सुरक्षा निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और खतरे का पता लगाने के लिए किया जाता है।

टेथर्ड ड्रोन: ये एक विशेष केबल के माध्यम से जमीन पर स्थित एक पावर स्टेशन या कंट्रोल यूनिट से जुड़े रहते हैं। यह केबल ड्रोन को लगातार बिजली और सुरक्षित डेटा प्रदान करती है, जिससे वे बिना बैटरी खत्म हुए घंटों हवा में रह सकते हैं।

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