Crime News: बेंगलुरु के तवारेकेरे इलाके में दो साल के बच्चे की कथित तौर पर सौतेले पिता द्वारा थप्पड़ मारने से मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।
Crime News: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक दो साल के मासूम को उसके सौतेले पिता ने इतनी जोर से थप्पड़ मारा की उसकी मौत हो गई। यह मामला शहर के तवारेकेरे इलाके का बताया जा रहा है और मृतक बच्चे की पहचान राकेश कुमार मुखी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, बच्चा खाना खाने में आनाकानी कर रहा था और लगातार रो रहा था। इसी दौरान गुस्से में आए आरोपी ने बच्चे को जोरदार थप्पड़ मारा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।
यह घटना रविवार शाम करीब 6:30 बजे मुथुरायास्वामी लेआउट के एक किराए के शेड में हुई। पुलिस के मुताबिक आरोपी दीपु सिंह (22) बच्चे का सौतेला पिता था। राकेश की मां कुंथला मुखी अपने पति को छोड़कर तीन महीने पहले ओडिशा से बेंगलुरु आई थी और आरोपी के साथ रह रही थी। घटना के समय कुंथला बच्चे को खाना खिला रही थी, लेकिन बच्चा लगातार रो रहा था और खाना नहीं खा रहा था। इसी बीच दीपु ने बच्चे को अपनी गोद में लिया और गुस्से में जोर से थप्पड़ मार दिया। परिवार के लोगों ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद बच्चे की मां ने शोर मचाया और आरोपी की बहन कंदाई सिंह को बुलाया। इसके बाद मकान मालकिन को सूचना दी गई। मकान मालकिन के बेटे केसी पवन कुमार मौके पर पहुंचे और बच्चे को मृत पाया। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। तवारेकेरे पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पास के एक प्लास्टिक फैक्टरी में काम करता था। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आरोपी बच्चे से छुटकारा पाना चाहता था और इसी वजह से उसने जानबूझकर हमला किया। मामले ने इलाके के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि बच्चा आरोपी का जैविक पुत्र नहीं था। बच्चे का असली पिता अभी ओडिशा में रह रहा है। पुलिस अब परिवार की पृष्ठभूमि और आरोपी के व्यवहार की भी जांच कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के साथ हिंसक व्यवहार के मामलों में समाज और प्रशासन दोनों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। यह घटना एक बार फिर घरेलू माहौल में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा करती है।