नई दिल्ली, Jun 03, 2026

दिल्ली जिमखाना क्लब का स्विमिंग पूल (सोर्स-दिल्ली जिमखाना क्लब की वेबसाइट)
दिल्ली जिमखाना क्लब को सरकार से जमीन खाली करने का नोटिस मिलने के बाद से यह क्लब अचानक सुर्खियों में आ गया है। सरकार के इस कदम पर 'एलीट' लोग भी दो खेमे में बंट गए हैं। यह क्लब दिल्ली के सबसे वीआईपी इलाके में 27 एकड़ से भी ज्यादा जमीन पर फैला हुआ है। इस जमीन के बदले क्लब जो किराया दे रहा है, वह धूल बराबर भी नहीं है।
1911 में जब किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाने का फैसला किया तो राजधानी में ब्रिटिश राज के अफसरों की मौज-मस्ती के लिए एक क्लब की भी जरूरत महसूस की गई। इसी जरूरत के तहत 1913 में सफदरजंग रोड पर क्लब के लिए जमीन दी गई।
क्लब बनाने में अहम भूमिका निभाने के लिए ग्वालियर, जयपुर, जोधपुर, कश्मीर, उदयपुर, किशनगढ़ के महाराजाओं और भोपाल के नवाब को क्लब की आजीवन सदस्यता दी गई थी। वैसे क्लब में भारतीयों की एंट्री आम तौर पर 1945 के बाद ही शुरू हुई थी।
क्लब में भारतीयों की एंट्री अमूमन बैन थी, लेकिन वाइसरॉय की पत्नी को स्विमिंग पूल का मजा लेने के लिए भारतीय के घर जाने से परहेज नहीं था। जिमखाना क्लब की वेबसाइट पर इस बारे में जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक 1930 के दशक तक दिल्ली जिमखाना क्लब में स्विमिंग पूल नहीं था। वाइसरॉय का जो बंगला बन रहा था, उसमें भी स्विमिंग पूल नहीं था। उनकी पत्नी लेडी विलिंगडन को स्विमिंग के लिए कोई जगह नहीं मिल रही थी। उन्हें इसकी कमी बड़ी खलती थी। उन्हें स्विमिंग के लिए रईस भारतीयों के घर जाना पड़ता था। उन्हें यह अच्छा नहीं लगता था। तब उन्होंने क्लब में स्विमिंग पूल बनाने के लिए अपनी तरफ से 21000 रुपए दान दिए।
16 मार्च, 1936 को जब वाइसरॉय लॉर्ड विलिंगडन और लेडी विलिंगडन अपनी विदाई पार्टी के लिए जिमखाना क्लब आए, तो वहां 'लेडी विलिंगडन स्विमिंग बाथ' और 'द विलिंगडन स्कवैश कोर्ट्स' की पट्टिका लग चुकी थी।
इस क्लब की सदस्यता अमीर और रसूखदार लोगों के लिए शान की बात होती थी। आज भी है। क्लब के सदस्यों में पूर्व राष्ट्रपति तक के नाम हैं। सदस्य बनने के लिए लोगों को दस-दस साल तक इंतजार करना पड़ता था। कहा जाता है, 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के पीए आरके धवन ने वेटिंग लिस्ट में कई लोगों को पीछे छोड़ते हुए जिमखाना क्लब की सदस्यता ले ली थी, लेकिन अध्यक्ष ने उसे रद कर दिया था।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हूडा की सदस्यता पांच साल के लिए बढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर भी क्लब की मैनेजमेंट कमिटी ने आपत्ति की थी। हूडा नामी टेनिस खिलाड़ी थे और बोरिस बेकर तक के खिलाफ खेल चुके थे।
वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर ने लिखा है कि कमलनाथ के मंत्री रहते जब क्लब के जमीन की लीज रीन्यू करने की फ़ाइल उनके पास पहुंची थी तो उन्होंने अपने कुछ लोगों के लिए 20 साल के लिए क्लब की मेंबरशिप की मांग रखी थी। मोदी के काल में ऐसे कई लोगों की सदस्यता खत्म की गई और बीजेपी से जुड़े लोगों को सदस्य बनाया गया।
हाल के वर्षों में जिमखाना क्लब के प्रबंधन पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदस्य बनाने, कुप्रबंधन और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। अप्रैल 2022 में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने दिल्ली जिमखाना क्लब का प्रबंधन केंद्र सरकार को अपने हाथ में लेने का फैसला सुनाया। दो साल बाद केंद्र सरकार ने क्लब पर कंपनी लॉ के उल्लंघन का आरोप लगाया। तब क्लब का प्रबंधन सरकार द्वारा नियुक्त किए गए निदेशकों के जिम्मे कर दिया गया।
भले ही जिमखाना क्लब अमीर लोगों का क्लब हो, लेकिन यहां भी सदस्यों द्वारा पैसे नहीं चुकाने जाने की बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए 2024 में क्लब प्रबंधन ने सदस्यों के लिए 'प्री-पेड स्मार्ट कार्ड' की व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सदस्यों को पैसा पहले जमा करना होता है। क्लब के एक सदस्य करण थापर ने तब अखबार में लेख लिख कर इसकी आलोचना की थी। उन्होंने इस व्यवस्था को सदस्यों के लिए अपमानजनक बताया था। इसके जवाब में तब के क्लब के चेयरमैन मलय कुमार सिन्हा ने उसी अखबार में जवाबी लेख लिखा था। इसमें उन्होंने बताया था कि क्लब के सदस्य सुविधाओं का फायदा उठा कर लंबे वक्त तक भुगतान नहीं करते हैं। जुर्माना लगाने और मेंबरशिप खत्म कर देने पर भी नहीं करते। उन्होंने आंकड़ा देकर बताया था कि 2022 से 2933 सदस्यों ने बार-बार कहने के बावजूद 3,09,59,371 रुपये का बकाया नहीं चुकाया है।
Updated on: 03 Jun 2026 05:31 pm

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