Great Nicobar Project: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को उद्योगपतियों का प्रोजेक्ट करार दिया है। उन्होंने कहा कि सामरिक स्थिति को INS बाज के जरिए मजबूत किया जा सकता है। पढ़ें पूरी खबर
Great Nicobar Project: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गंभीर पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद सरकार इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने इसके सामरिक औचित्य को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए कहा कि जल्द ही ग्रेट निकोबार पोर्ट मोदी-आदानी साम्राज्य का हिस्सा बन जाएगा। यह हमारे सैन्य बुनियादी ढांचे में कोई योगदान नहीं देता है। कैंपबेल बे में INS बाज को विस्तार देने से सामरिक क्षमता बढ़ेगी।
जयराम रमेश बीते कई सालों से इस इलाके में परियोजनाओं के शुरू होने का विरोध करते आ रहे हैं। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय रूप से विनाशकारी बताया है। उन्होंने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक मौसम पर आधारित अध्ययन की नहीं, बल्कि द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहु मौसमी अध्ययन की जरूरत है।
जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की टिप्पणियों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पहले के कार्यवाही में क्लियरेंस प्रक्रिया में कई कमियां बनी हुई हैं। उन्होंने ISRO के स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए गलाथिया बे में कटाव संवेदनशील क्षेत्रों की ओर इशारा किया। साथ ही, NGT को सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई हाई-पावर्ड कमिटी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने परियोजना के औचित्य में बदलते तर्कों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय जरूरत बताई गई, अब सामरिक आवश्यकता का हवाला दिया जा रहा है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में भारत की रक्षा आवश्यकताओं को INS बाज जैसे मौजूदा ढांचे को मजबूत करके पूरा किया जा सकता है। रमेश ने कहा कि वर्तमान रूप में ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना मुख्य रूप से एक व्यावसायिक उद्यम है। उन्होंने चेतावनी दी कि कई हैबिटेट्स और प्रजातियां सूचीबद्ध किए जाने से पहले ही नष्ट हो जाएंगी।