# लखनऊ

क्या क्लाइमेट चेंज बना वजह? यूपी में इस बार क्यों इतना खतरनाक हुआ आंधी-तूफान

Pre Monsoon Storm: यूपी में प्री-मानसून का ऐसा कहर पहले भी दिखा था, लेकिन इस बार तबाही कहीं ज्यादा बड़ी रही। क्या क्लाइमेट चेंज अब मौसम को और खतरनाक बना रहा है?

3 min read
शहर में हो रही बारिश, PC- IANS

UP Weather Update: यूपी इस सप्ताह एक भयावह प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया। राज्य के कई जिलों में अचानक आए आंधी-तूफान और बारिश ने जमकर तबाही मचाई। इससे 100 से अधिक लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। पेड़ उखड़ गए, मकानों की दीवारें ढह गईं, और बिजली के खंभे धराशायी हो गए। यह तूफान सामान्य मौसमी घटनाओं से कहीं अधिक विनाशकारी साबित हुआ।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

सबसे अधिक नुकसान प्रयागराज में हुआ, जहां 21 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके बाद मिर्जापुर में 19 और भदोही में 16 लोगों की जान गई। इसके अलावा, राज्य के अन्य कई जिले भी इस तूफान की चपेट में आए। बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हुए, फसलें बर्बाद हुईं और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली गिरने से भी कुछ लोगों की मौत होने की खबरें हैं।

क्या होती है 'आंधी' और क्यों आती है?

मौसम विज्ञान में इस तरह की घटना को 'आंधी' कहा जाता है। यह मुख्यतः मॉनसून से पहले के महीनों-अप्रैल, मई और कभी-कभी जुलाई तक में उत्तरी भारत में आती है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक के साथ बारिश और कभी-कभी ओलावृष्टि भी होती है। ऐसी घटनाएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं।दुनियाभर के शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में ये होती रहती हैं।

आमतौर पर इन आंधियों में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहती है और बड़ा नुकसान नहीं होता। लेकिन जब हवाएं 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पार कर जाती हैं, तो स्थिति खतरनाक हो जाती है। तेज हवाएं बड़े-बड़े पेड़ उखाड़ सकती हैं, कच्ची-पक्की दीवारें गिरा सकती हैं और हल्की वस्तुएं हवा में उड़कर घातक हथियार बन सकती हैं।

इस बार आंधी-तूफान इतना भयंकर क्यों था?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस बार कम से कम आठ जिलों में हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे को पार कर गई, और कुछ स्थानों पर यह 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। यह किसी भी सामान्य मौसमी तूफान से बहुत अधिक था।

इस असाधारण तीव्रता के पीछे कई मौसमी कारकों का एक साथ सक्रिय होना जिम्मेदार रहा….

अत्यधिक गर्मी

कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था, जिससे जमीन की सतह के पास की हवा असाधारण रूप से गर्म हो गई।

बंगाल की खाड़ी से नमी का आगमन

दक्षिण-पूर्वी दिशा से चलने वाली हवाओं ने बंगाल की खाड़ी से नमी को उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंचा दिया। यह नमी तूफान के लिए ईंधन का काम करती है।

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

ईरान की ओर से आने वाली पश्चिमी विक्षोभ प्रणाली के कारण ऊपरी वायुमंडल में हवा ठंडी और शुष्क थी, जबकि जमीन के पास की हवा गर्म और नमीयुक्त। इस तापमान के अंतर ने वायुमंडल में भारी अस्थिरता पैदा की। मौसम विभाग के मुताबिक, यही वायुमंडलीय अस्थिरता इस तरह के भीषण तूफानों की जड़ होती है।

हालात 2018 जैसे ही थे

यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में इस स्तर की तबाही हुई हो। वर्ष 2018 में भी मई-जून के महीनों में ऐसे ही कई बड़े तूफान आए थे, जिनमें 100 से अधिक लोगों की जानें गई थीं। इस बार भी हालात उसी तरह के रहे। वैसे तो उत्तरी भारत में हर साल आंधी-तूफ़ान से करीब एक दर्जन मौतें होती हैं, लेकिन ये घटनाएं पूरे साल में बिखरी होती हैं। इस बार एक ही घटना में इतनी बड़ी संख्या में जानें जाना बेहद चिंताजनक है।

पूर्वानुमान हुआ, पर कम आंका गया

IMD ने इस तूफान के आने से पहले अलर्ट जारी किए थे। शुरुआती पूर्वानुमान में हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की बात थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 70 किलोमीटर प्रति घंटे किया गया। तत्काल मौसम बुलेटिन (Nowcasts) में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति की चेतावनी दी गई। हालांकि ये पूर्वानुमान काफी हद तक सही रहे, लेकिन जिन छह-सात जिलों में हवा 100 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर चली, उनके लिए यह अनुमान कम पड़ गया।

क्यों नहीं हो पाता बचाव जैसा चक्रवात में?

चक्रवात और आंधी में एक बड़ा फर्क है। चक्रवात की दिशा तय होती है। वह समुद्र की तरफ से तट की ओर आता है इसलिए तटवर्ती इलाकों से लोगों को पहले ही हटाया जा सकता है। इसीलिए चक्रवात प्रबंधन में भारत को काफ़ी सफलता मिली है।