Avoid Salt And Sugar For Babies: आज की स्टोरी में क्लिनिकल डायटीशियन डॉ. अर्पणा इंदोरिया से विस्तार से जानेंगे कि 1 से 12 महीने के बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन्हें नमक और चीनी वाला आहार क्यों नहीं देना चाहिए।
Risks Of Salt And Sugar In Baby Diet: जन्म के 6 महीने बाद बच्चे को ठोस भोजन देना शुरू किया जाता है। इस दौरान कई माता-पिता स्वाद बढ़ाने के लिए बच्चों के खाने में नमक और चीनी मिलाना शुरू कर देते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार 1 साल से कम उम्र के बच्चों (Infants) को नमक और रिफाइंड शुगर देना उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्लिनिकल डायटीशियन डॉ. अर्पणा इंदोरिया बताती हैं कि इससे किडनी पर दबाव बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, दांतों की समस्या और Unhealthy Eating Habits का खतरा बढ़ सकता है।
डायटीशियन डॉ. अर्पणा इंदोरिया बताती हैं कि 6 से 12 महीने के बच्चों को नमक नहीं देना चाहिए क्योंकि उनकी किडनी पूरी तरह विकसित नहीं होती है। ऐसे में उनके खाने में नमक डालने से उन पर ज्यादा दबाव पड़ता है, क्योंकि बच्चों की किडनी नमक में मिलने वाले सोडियम को सही तरीके से छानकर बाहर नहीं निकाल पाती है। ऐसे में शरीर में अधिक नमक से कैल्शियम कम हो सकता है, जिससे बच्चे को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।
बच्चे की दैनिक सोडियम की आवश्यकता मां के दूध से ही पूरी हो जाती है। ऐसे में 6 से 12 महीने के बच्चों को नमक देने से बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही यह डर भी होता है कि अगर बच्चे नमक वाला खाना खाएंगे, तो उन्हें बाद में फीका खाना पसंद नहीं आएगा।
6 से 12 महीने के बच्चों को मीठी चीजें जैसे चॉकलेट, बिस्कुट, आइसक्रीम या रिफाइंड शुगर से बने फूड आइटम्स इसलिए नहीं देने चाहिए क्योंकि यह खून में बहुत तेजी से घुल जाती है, जिससे दिमाग को तुरंत 'पेट भरने' (Fullness) का सिग्नल मिल जाता है और बच्चे को भूख नहीं लगती। इसके साथ ही मीठे में ज्यादातर सिर्फ कैलोरी होती है, जिससे बच्चे को एनर्जी तो मिल जाती है लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलता। इसके अलावा, इन चीजों के पचने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है, जिससे बच्चे का पेट काफी देर तक भरा हुआ महसूस होता है और वह खाना खाने से मना कर देते हैं।
6 से 12 महीने के बच्चों को चीनी वाले फूड आइटम्स देने से खाना न खाने के साथ ही दांतों में सड़न (कैविटी) होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, मीठा चखने के बाद ज्यादातर बच्चे बाद में सादा और पौष्टिक खाना खाने से मना कर सकते हैं।