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Rajasthan : नहीं रहे बांग्लादेश वॉर के हीरो अब्दुल गफूर आजाद, वर्ष 1971 की जंग के दौरान आर्मी की एएससी में थे

झालावाड़ में 1971 युद्ध के वीर और पूर्व सैनिक अब्दुल गफूर आजाद का निधन हो गया। वे आर्मी की एएससी (एमटी) में तैनात थे। अब्दुल गफूर उर्फ आजाद को गंभीर बीमारी के चलते आर्मी मेडिकल बोर्ड द्वारा रिटायर कर दिया था।

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अब्दुल गफूर आजाद उर्फ फौजी अब्बा फोटो। पत्रिका

कोटा। वर्ष 1971 में बांग्लादेश जंग के हीरो रहे अब्दुल गफूर आजाद उर्फ फौजी अब्बा का मंगलवार को झालावाड़ में निधन हो गया। फौजी अब्बा वर्ष 1971 की जंग के दौरान आर्मी की एएससी (एमटी) में थे और जंग के दौरान सिलीगुड़ी में तैनात थे। अब्दुल गफूर उर्फ आजाद को गंभीर बीमारी के चलते आर्मी मेडिकल बोर्ड द्वारा रिटायर कर दिया था। अपने जीवन के अंतिम दिनों में अभावों में जीवन बिताया, गरीब नवाज कॉलोनी में किराए के मकान में रहते थे। फौजी अब्बा ने 85 साल की उम्र में 2 जून को झालावाड़ में अपनी अंतिम सांस ली और सदा के लिए अमर हो गए।

फौजी अब्बा की बहादुरी की एक कहानी

एक ऑपरेशन के दौरान उन्हें 12 सीनियर सैनिकों के साथ बांग्लादेश के फौजियों ने कैद कर लिया था। 22 दिन कैद में रहने के बाद वो सभी साथियों के साथ बच निकलने में कामयाब रहे थे, जिसके बाद कई बांग्लादेशी सैनिकों को भी उन्होंने मौत के घाट उतारा। इसी दौरान उन्हें पैर में गोली भी लगी। अब्दुल गफूर सहित सभी 12 सैनिकों को मेजर प्रीतम सिंह द्वारा मेडल देकर सम्मानित किया था।
( यह कहानी 1971 भारत-पाकिस्तान जंग का हिस्सा नहीं है। )

1971 बांग्लादेश जंग क्या थी

वर्ष 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम दक्षिण एशिया के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है। उस समय बांग्लादेश, पाकिस्तान का पूर्वी भाग था, जिसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और भाषाई भेदभाव का सामना कर रहे पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने अपने अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।

मुक्ति वाहिनी ने संभाला मोर्चा

मार्च 1971 में पाकिस्तान की सेना द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद संघर्ष और तेज हो गया। इसके बाद बांग्लादेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जिन्हें मुक्ति वाहिनी कहा जाता था, ने पाकिस्तान सेना के खिलाफ मोर्चा संभाला। भारत ने भी मानवीय और रणनीतिक कारणों से इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा लाखों शरणार्थियों को शरण दी। 3 दिसंबर 1971 को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ, जो 16 दिसंबर 1971 तक चला।

स्वतंत्र बांग्लादेश

इस दौरान भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी ने संयुक्त रूप से अभियान चलाए। अंततः पूर्वी पाकिस्तान में तैनात पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया, जिसके कारण यह संघर्ष भारत के सैन्य इतिहास के गौरवशाली अध्यायों में शामिल है।